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स्कूल में प्राचार्य, शिक्षक और लिपिक का टोटा

Wed, 19 Oct 2016 12:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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टीचर - फोटो : demo pic
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महेंद्रगढ़।
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राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में स्टाफ की कमी के कारण जहां विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है वहीं बच्चों की संख्या भी कम हो गई है। स्कूल में मुखिया हैं न शिक्षक। कार्यकारी प्राचार्य भी स्कूल के प्राचार्य और लिपिक का काम भी स्वयं ही देखते हैं। स्कूल के पीजीटी लेक्चरर ही अतिरिक्त कक्षाएं लेकर बच्चों की पढ़ाई पूरी करवा रहे हैं। तीन वर्षों से स्कूल के यही हाल हैं। शिक्षा विभाग को स्कूल की दयनीय स्थिति का रिमाइंडर कई बार भेजा जा चुका है, लेकिन अभी तक कोई सुधार नहीं हो रहा। 15 वर्ष पहले स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या तीन हजार थी जब अब घटकर मात्र 151 रह गई है।

टीजीटी के सभी पद खाली
राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय डेरोली अहीर में टीजीटी स्टाफ में तीन अध्यापकों की कमी है। स्कूल में जून 2013 से विज्ञान, गणित और संस्कृत के शिक्षकों के पद रिक्त पड़े हैं। तीन वर्षों से यहां कोई भी अध्यापक नहीं आया है। इसके अलावा प्राचार्य, पीटीआई, लिपिक का पद भी खाली पड़ा है। मिडिल स्कूल में विज्ञान का पद खाली है जबकि विज्ञान अध्यापक ही विद्यार्थियों को मैथ पढ़ाता है यानी मैथ का पद भी खाली ही है।
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15 वर्षों में 2800 विद्यार्थी कम
राजकीय मिडिल स्कूल में 15 साल पहले 3000 विद्यार्थी थे। यह आंकड़ा घटकर अब मात्र 18 रह गया है। 15 साल पहले गांव में राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक  विद्यालय की स्थापना हुई। उसमें भी मात्र 151 छात्राएं हैं। 15 साल में 2800 से अधिक विद्यार्थी गांव के सरकारी स्कूल से कम हुए हैं। स्कूल में आसपास के दस स्कूलों के बच्चे आते थे लेकिन अब तो डेरोली के भी पूरे नहीं आते हैं। इसका मुख्य  कारण अध्यापकों के खाली पद रहे है। आज भी डेरोली अहीर के स्कूलों में  अध्यापकों की कमी है। हालात यह है कि कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय डेरोली अहीर में टीजीटी लेवल पर सभी पद खाली पड़े हैं। मिडिल स्कूल में एक पद खाली है। इस स्कूल में मात्र बच्चे 18 हैं।

लेक्चरर पर है मिडिल और सीनियर सेकेंडरी का भार
राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय डेरोली अहीर में प्राइमरी में 71, मिडिल में 38 और 9वीं से 12वीं तक 42 छात्र-छात्राएं हैं। स्कूल में आर्ट और साइंस संकाय है। 9 से 12वीं कक्षा के 42 छात्राओं को सात प्रवक्ता पढ़ा रहे हैं। इन प्रवक्ताओं पर मिडिल कक्षाओं का भी भार है। अतिरिक्त कक्षाओं में पढ़ाकर स्कूल का काम चला रहे हैं लेकिन रिजल्ट के मामले में उनकी जवाबदेही नहीं बनती। इतना ही नहीं पिछले वर्ष जेबीटी के लिए इंटरशिप करने आए छात्र अध्यापकों से काम चलना पड़ा। इस दौरान उन्होंने छह माह तक बच्चों को पढ़ाया। मिडिल स्कूल में मात्र 18 बच्चे हैं तीन अध्यापक कार्यरत हैं तो एक की पोस्ट खाली है।
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अभी सरकार ने टीजीटी पदों के तबादलों के लिए पोर्टल खोला है। जल्द ही टीजीटी अध्यापकों का तबादला हो जाएगा। तबादला प्रक्रिया पूरी होने के बाद किसी भी स्कूल में अध्यापकों की कमी नहीं रहेगी। -राजेंद्र यादव, खंड शिक्षा अधिकारी अटेली
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