अवैध बजरी वाशिंग प्लांट संचालन के झूठे दस्तावेज तैयार कर निर्दोष को फंसाने के आरोपियों पर हाईकोर्ट ने शिकंजा कस दिया है। दो आरोपियों की अंतरिम जमानत खारिज कर पुलिस को गिरफ्तारी के निर्देश दिए हैं। एडवोकेट सत्यपाल यादव के अनुसार जांच में पुलिस का सहयोग नहीं करने पर न्यायाधीश जमानत डिसमिस कर दी है।
शहबाजपुर, दोस्तपुर, दोस्तपुर, ढाणी जाजमा, भेडंटी में अवैध बजरी वाशिंग प्लांट स्थापित थे। तत्कालीन उपायुक्त संजीव वर्मा के आदेशानुसार 27 अप्रैल 2016 को पुलिस अधीक्षक हामिद अख्तर के नेतृत्व में छापामारी की गई थी। कार्रवाई के दौरान पांच प्लांट पर तोड़फोड़ की गई। अंधेरा होने के कारण अन्य संचालक संसाधनों समेत भागने में कामयाब हो गए थे। इसी दौरान शातिर लोगों ने ढाणी जाजमा निवासी रघुबीर पुत्र हरलाल का नाम अवैध प्लांट संचालकों की सूची में दर्ज करवा दिया। इसके बाद प्रदूषण विभाग के तत्कालीन एसडीओ आरके भौंसले ने पुलिस में केस दर्ज करवा दिया था। इसी दौरान राजेंद्र पुत्र रामचंद्र ढाणी जाजमा निवासी ने फर्जी बिल बुक और अन्य दस्तावेज थाने भेजकर कार्रवाई की गुहार लगाई। यहीं से मामले का भंडाफोड़ होना शुरू हुआ। इसके थोड़े दिन बाद दताल पंचायत की सरपंच मुकेश देवी का जेठ देशराज पुत्र रामेश्वर ने फर्जी दस्तावेजों को आधार बनाकर सीएम विंडो पर शिकायत दर्ज करवाई। जन जागृति मंच के संस्थापक एवं हाईकोर्ट के एडवोकेट सत्यपाल यादव ने सरपंच के पति जसवंत, ससुर रामेश्वर, राजेंद्र पुत्र रामचंद, रामपाल कामनियां समेत पांच नामजद आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। पुलिस की गिरफ्तारी से बचने के लिए देशराज पुत्र रामेश्वर और राजेंद्र पुत्र रामचंद्र ने सेशन कोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी दायर की थी।
सीआईए करेगी जांच
हाईकोर्ट के एडवोकेट सत्यपाल यादव ने बताया कि आरोपियों ने जांच से भटकाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कर सीएम विंडो पर शिकायत दी। मामले की जांच सीआईए करेगी। थाना प्रभारी शफीउद्दीन ने बताया कि केस से संबंधित फाइल स्टेट क्राइम विभाग को सौंप दी गई।
फर्जी हस्ताक्षरों से रिसीव हुआ नोटिस
आरोपियों ने पुलिस को रघुबीर सिंह पुत्र हरलाल के नाम से जारी प्रदूषण विभाग का एक नोटिस उपलब्ध करवाया है। थाना प्रभारी ने विभाग के कार्यालय से नोटिस रिसीव की स्लिप निकलवाई। इसमें देवता निवासी राजेंद्र पुत्र बलबीर के हस्ताक्षर मिले। पूछताछ के दौरान राजेंद्र ने हस्ताक्षरों को फर्जी करार दिया।