मंडी अटेली। महेंद्रगढ़ जिले का एक छोटा सा शहर अटेली ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए जाना जाता है। यह शहर अहीर बाहुल्य क्षेत्र है। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और तमिलनाडु के राज्यपाल रहे स्व. सुरजीत सिंह बरनाला का जन्म स्थान भी यहीं है।
1949 में अटेली को नगर पालिका का दर्जा मिला। 74 गांव शामिल किए गए थे, लेकिन विकास के नाम पर यहां बहुत कम काम हुए। शहर के नागरिक आज भी मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे हैं। नगर पालिका गठन के बाद अब तक नपा के 21 चेयरमैन बन चुके हैं, लेकिन विडंबना इस बात की है कि किसी भी चेयरमैन का ध्यान शहर की इन सुविधाओं की ओर नहीं गया।
शहर में सुलभ शौचालय की कमी एक बड़ी समस्या है। यहां केवल झंडा चौक पर एक ही सार्वजनिक शौचालय है। इसके अलावा, शहर का राजस्व विभाग में कोई नाम नहीं है। खंड विकास और पंचायत कार्यालय अटेली नांगल के रूप में जाना जाता है, डाकघर मंडी अटेली तो वहीं रेलवे स्टेशन अटेली के नाम से है। हालांकि अटेली के विकास के लिए कुछ प्रयास किए जा रहे हैं। 8 वर्ष पहले सीहमा को खंड विकास और पंचायत कार्यालय का दर्जा मिलने के बाद 31 गांवों को उससे जोड़ दिया गया।
हाल ही में 43 गांव अटेली खंड विकास कार्यालय से जुड़े हुए हैं। अटेली कस्बे की सब्जी मंडी झंडा चौक पर स्थापित है, लेकिन यह मंडी आबादी के हिसाब से बहुत छोटी है। लगभग 8 साल पहले अनाज मंडी में सब्जी मंडी बनाने के लिए जगह तय की गई थी, लेकिन यह परियोजना शिलान्यास तक ही सीमित रह गई। अटेली को तहसील का दर्जा मिलने के बावजूद, यह क्षेत्र विकास के मामले में अभी भी पिछड़ा हुआ है। सैनिकों के लिए भी यहां कोई विशेष सुविधा नहीं है। इस क्षेत्र के कई सैनिकों ने देश की रक्षा में अपनी जान दे दी।
10जेएनडी29: चुनाव जीतने के बाद प्रधान समेत अन्य पदाधिकारी खुशी मनाते हुए। अधिवक्ता- फोटो : रेलवे स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार करते यात्री।