फोटो नंबर- 19शुरेश कुमार पाहुजा, पूर्व जिला मंत्री, व्यापार मंडल, नारनौल।
नारनौल। हर बड़े बदलाव की शुरुआत एक छोटे कदम से होती है। एमएसएमई यानी सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं जो न सिर्फ रोजगार दे रहे हैं बल्कि आत्मनिर्भर भारत की नींव भी मजबूत कर रहे हैं।
जिले में भी कुछ युवा ऐसे हैं जिन्होंने सीमित संसाधनों में बड़ा सपना देखा। ये युवा नवाचार, जिद और मेहनत से अपने व्यवसाय को नई ऊंचाई दे रहे हैं। वहीं सूक्ष्म व लघु उद्यम को बढ़ावा देने के सरकार द्वारा योजनाओं का लाभ उठाकर आगे बढ़े लेकिन साथ ही योजनाओं की जानकारी के अभाव व दस्तावेज जटील प्रक्रिया के कारण परेशानी का सामना भी करना पड़ता है।
-
ग्रेजुएशन के बाद मैंने लगभग 24 वर्षों तक सर्विस सेक्टर में काम किया और प्रतिष्ठित कंपनियों के प्रोडक्ट की सर्विस संभाली। महेंद्रगढ़, फरीदाबाद, पलवल और रेवाड़ी में काम करते हुए मैं हर माह करीब 5000 ग्राहकों की शिकायतों का समाधान करता था। वर्ष 2023 में मैंने फर्नीचर का अपना व्यवसाय शुरू किया। मेरा मानना है कि गुणवत्ता और मेहनत से व्यापार में निरंतर वृद्धि संभव है।
-रितेश अग्रवाल, व्यापारी, नारनौल
समय के साथ-साथ लघु उद्योग में अपार संभावनाएं भी बनी है तो नई चुनौतियां भी आई है। सरकार को व्यापारियों के आर्थिक सुरक्षा सम्मान व सरकारी सुविधाओं जैसे आसान लोन, बीमा योजना व टैक्स में राहत देनी चाहिए। वहीं, छोटे उद्योग के लिए विशेष योजनाएं बनानी चाहिए।
-शुरेश कुमार पाहुजा, पूर्व जिला मंत्री, व्यापार मंडल, नारनौल