नारनौल। कोमल सैनी के परिवार की महिलाएं ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं हैं। उनके मन में शिक्षा अधूरी रह जाने की कसक है। यही बात कोमल के मन में गहराई तक उतर गई और उसने बचपन में ही ठान लिया कि वह पढ़-लिखकर शिक्षिका बनेगी और उनका सपना पूरा करेगी।
साल 2002 को स्वतंत्रता दिवस के दिन नारनौल की रामकरणदास कॉलोनी में किरोड़ीमल सैनी के घर जन्मी कोमल तीन भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं। बचपन से ही वह पढ़ाई में मेधावी रही हैं। उन्होंने 10वीं तक की पढ़ाई आदर्श हाई स्कूल, 12वीं एएसडी स्कूल और स्नातकोत्तर (एमए) की शिक्षा राजकीय महिला कॉलेज से प्राप्त की। संवाद
महादेवी वर्मा को मानती हैं आदर्श
कोमल प्रसिद्ध कवयित्री, स्वतंत्रता सेनानी और शिक्षाविद् महादेवी वर्मा को अपना आदर्श मानती हैं। उनकी जीवनी और विचारों से प्रेरित होकर कोमल ने एमए के बाद यूजीसी-नेट परीक्षा की तैयारी शुरू की। उन्होंने घर पर रहकर स्वाध्याय के माध्यम से तैयारी की और स्वयं नोट्स तैयार किए।
बड़े भाई ने दिया हौसला
प्रयास में वह कुछ अंकों से यूजीसी नेट की परीक्षा पास नहीं कर सकीं। इससे वह मानसिक रूप से निराश हो गईं और अवसाद की स्थिति में चली गईं। परिवार से भी कम बातचीत करने लगीं। इसी दौरान उनके बड़े भाई ने उन्हें प्रेरित करते हुए कहा, अगर दौड़ में एक बार गिर जाओ तो इसका मतलब यह नहीं कि दौड़ खत्म हो गई। दौड़ तब खत्म होती है जब तुम दौड़ना छोड़ देते हो। भाई की इस बात ने कोमल को नई ऊर्जा दी। उन्होंने दोबारा पूरी लगन से तैयारी की और दूसरे प्रयास में हिंदी विषय में यूजीसी-नेट परीक्षा उत्तीर्ण कर ली।