किसानों के अरमानों पर शनिवार की शाम ओले गिरे। जिले के करीब तीन चार दर्जन गांवों में जमकर ओलावृष्टि के साथ बारिश भी हुई। महेंद्रगढ़, कनीना, सतनाली क्षेत्र के गांवों में बारिश से रबी फसलों के लिए किसान चिंतित है। जिले के लगभग 50 गांव ओलावृष्टि से प्रभावित हो सकते हैं। अभी गांवों की सही स्थिति के बारे में पता नहीं चला है। डीसी के पास रात तक गांवों की रिपोर्ट जा रही थी। वहीं पूर्व शिक्षामंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा ने ओला प्रभावित गांवों का दौरा किया। इस मौके पर उन्होंने मुख्यमंत्री मनोहर लाल से फोन पर बात कर क्षेत्र में गिरदावरी करवाकर ओला प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की मांग की। वहीं कुछ गांव के किसान विधायक राव दान सिंह के पास पहुंचे। इस मौके पर कांग्रेसी विधायक राव दान सिंह ने सरकार से 25 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने की मांग की है।
शनिवार शाम करीब चार बजे आकाश में अचानक काली घटा छा गई। इसके बाद दिन रात में बदल गया। थोड़ी देर में ओलावृष्टि शुरू हो गई। कई स्थानों पर नींबू के साइज के ओले गिरे । देखते ही देखते तेज ओलावृष्टि हुई और अनेक जगह बर्फ की चादर बिछ गई। जिन क्षेत्रों में ज्यादा ओलावृष्टि हुई है, वहां किसान चिंतित है। उन्हें अपनी सरसों, गेहूं, चने की फसल बर्बाद होने की चिंता सता रही है। किसान अब सुबह की आस लगाए बैठे ताकि खेतों में जाकर नुकसान का सहीं अनुमान लगा सके। इसके अलावा जिन गांवों में सिर्फ बारिश हुई है वहां किसान खुश है। बारिश गेहूं, सरसों की फसल के लिए बेहतर है।
इन गांवों में हुई ओलावृष्टि
जांट, भुरजट, बवाना, मालड़ा, माजरा खुर्द, माजरा कलां, बुचावास, आनावास, आकोदा, बसई, खुडाना, पाली, झुक, सीगड़ा, पाथेड़ा, माधोगढ़, राजावास, राठीवास, खातोद, रिवासा, भगडाना, कुराहवटा, मांडोला, उष्मापुर, देवनगर सहित अनेक गांव में ओलावृष्टि हुई।
तापमान में आई गिरावट, ठंड बढ़ी
बारिश और ओलावृष्टि के बाद तापमान में करीब चार डिग्री की गिरावट आई। अधिकतम तापमान 22 तो वहीं न्यूनतम तापमान भी 14 डिग्री पहुंच गया है। बढ़ी ठंड के कारण लोग रात को अपने घरों में दुबकने को मजबूर है। शाम को हुई बारिश के कारण शादी का सीजन होने के बावजूद बाजार खाली थे। ग्राहक नहीं होने के कारण दुकानदार भी अपनी दुकानों को जल्दी बढ़ाकर चले गए। रात को भी बारिश तथा तेज हवा चलती रही।
अभी रिपोर्ट बनाने में लग रहे हैं। इस समय सही रिपोर्ट नहीं बताई जा सकती। हमारे पास गांवों से ओले गिरने की रिपोर्ट लगातार आ रही है। रिपोर्ट बनने के बाद ही सही जानकारी दी जा सकेगी। -जगदीश शर्मा, डीसी, महेंद्रगढ़।
महेंद्रगढ़ क्षेत्र के किसानों के लिए गेहूं व सरसों ही नगदी फसल मानी जाती हैं । इन फसलों को बेचकर ही किसान जहां अपने घर का काम चलाते हैं वही बच्चों की पढ़ाई व अन्य कार्यों में खर्च करते हैं। बारिश के साथ हुई इस ओलावृष्टि ने किसानों की फसलों को बर्बाद कर किसानों की कमर तोड़ दी है। ऐसे में सरकार विशेष गिरदावरी कराकर किसानों को 25 हजार प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा दें।
-राव दान सिंह, विधायक (कांग्रेस), महेंद्रगढ़
मैंने ओलावृष्टि से प्रभावित दो दर्जन से अधिक गांवों का दौरा किया। प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल से दूरभाष पर बात कर महेंद्रगढ़ विधानसभा में गिरदावरी करा ओला प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की मांग की। मैंने सीएम को कहा कि महेंद्रगढ़ इलाके का किसान कृषि पर आधारित है। उनकी फसल 80 परसेंट से अधिक ओला गिर जाने से नष्ट हो गई है इसलिए तुरंत ओला प्रभावित इलाके का गिरदावरी करवा मुआवजा दें। -रामबिलास शर्मा, पूर्व शिक्षामंत्री।
महेंद्रगढ़ क्षेत्र में शनिवार की शाम को हुई भारी बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं, सरसों और अन्य फसलें बर्बाद हो गई हैं। क्षेत्र के विभिन्न गांवों में हुई भारी ओलावृष्टि व बरसात के चलते खेतों में हुए नुकसान की विशेष गिरदावरी करवा कर प्रभावित किसानों को कम से कम 30 हजार प्रति एकड़ मुआवजा जल्द दिया जाए। -कुलदीप यादव, पीआरओ, सरताज जनसेवा ग्रुप।
क्षेत्र में गिरे ओले दिखाता किसान।- फोटो : Narnol