महेंद्रगढ़। शहर में बंदरों ने लोगों का चैन छीन लिया है। कई मोहल्लों में तो इनका उत्पात इस कदर बढ़ गया है कि बच्चों ने घरों के बाहर खेलना तक छोड़ दिया है। लोगों का कहना है कि घरों के आंगन में बैठकर खाना सपना हो गया है।
दिनभर इनके झुंड जमकर शहर में उत्पात मचाते हैं। इनके हमले से पांच माह में 650 लोग घायल हो चुके हैं। प्रतिदिन औसतन पांच लोग इनके हमले का शिकार बन रहे हैं। विशेषकर महिला, बच्चों और बुजुर्गों पर अधिक हमले हो रहे हैं। भगाने का प्रयास किया जाता है तो यह झुंड हमला करने से भी नहीं चूकते। अब यह शहर की बड़ी समस्या बन गई है। लेकिन निदान का कोई प्रयास तक नहीं किया जा रहा है।
लोगों का कहना है कि अब यह समस्या धीरे-धीरे विकराल होती जा रही है। रसोई में रखे सामान से लेकर घरों की छतों तक लोगों ने इनसे बचाव के लिए विशेष प्रबंध भी करने शुरू कर दिए हैं। सामान लेकर गुजरने वालों की थैलियां व बैग छीनना आम हो गया है। शहर की पुरानी व खंडहर हवेलियां इनका सुरक्षित आशियाना हैं।
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ज्यादा भय तो महिलाओं और बच्चों में हैं जो घर से बाहर निकलने में भी संकोच करने लगी हैं। अब ये बंदर रात में भी हमला कर घायल कर रहे हैं। शहर में विशेषकर दुकानदार भी बंदरों से खासे परेशान हैं। इनके झुंड अचानक हमला बोल दुकानों और रेहड़ियों से सामान भी उठा ले जाते हैं। - डॉ. रोहताश, मोहल्ला कुम्हारान
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शहर के मोहल्ला नीमड़ी नीचे, मोहल्ला जवाहरनगर, नागरिक अस्पताल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, करेलिया बाजार, सब्जी मंडी, अनाज मंडी, मोहल्ला तिवाड़ियान, मोहल्ला महायचान, मोहल्ला खटीकान, मोहल्ला शेरागुवाड़ी, शनि मंदिर सहित शहर में बंदरों का आतंक बढ़ता ही जा रहा है। नगर पालिका की ओर से अभी तक कोई प्रयास तक नहीं किए गए हैं। - नरेंद्र मेहता, आईटीआई रोड
बंदरों की लगातार बढ़ रही संख्या से परेशानी हो रही है। जल्द ही नगर पालिका सदन की बैठक बुलाकर विचार-विमर्श करके ठोस योजना तैयार की जाएगी। इन्हें पकड़वाकर सुरक्षित स्थानों पर छोड़कर शहरवासियों को इस बड़ी समस्या से निजात दिलाई जाए। आए दिन बच्चों एवं बुजुर्गों पर हमले हो रहे हैं। यदि जल्द इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया तो गंभीर हो जाएगी। - दिनेश चंद्र वैध, प्रधान ब्राह्मण सभा
कई मोहल्लों में परेशानी इतनी बढ़ गई है कि महिलाओं ने छतों पर ही जाना से तौबा कर लिया है। छतों पर रखे सामान को तोड़ना आम हो गया है। छतों पर रखी पानी की टंकियों को जालियों से ढकना मजबूरी बन गई है। घरों के आंगन में बैठकर खाना सपना हो गया है। कुछ मोहल्लों में तो बड़ी समस्या बन गई है। - कृष्ण सैनी, सब्जी मंडी महेंद्रगढ़
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एक सप्ताह पूर्व बंदरों के झुंड ने अचानक हमला कर दिया था। बचाव कर पांच घंटे कमरे में बंद रहना पड़ा था। बंदर हमले के लिए खिड़कियों व जालियों से झांककर देखते रहे। हमले का इंतजार करते रहे। इसके बाद फोन कर आसपास के लोगों की मदद से लाठियों से सहारे झुंड को खदेड़ा गया था। - अशोक शर्मा, गोशाला रोड
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दस सालों के दौरान इननी संख्या दस गुना बढ़ गई है। अब हर मोहल्ले में इनकी चहलकदमी बेखौफ देखी जा सकती है। रात में बंदरों की आपस में लड़ाई भी कई घंटों तक चलती है जो शहरवासियों की नींद हराम कर रही है। महिला, बच्चे व बुजुर्गों पर हमले लगातार बढ़ रहे हैं। - सीताराम सैनी, शंकर काॅलोनी महेंद्रगढ़।
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- वर्जन:
शहरवासियों की ओर से लगातार शिकायतें आ रही है। जल्द ही नपा सदन की बैठक बुलाकर प्रस्ताव पास कर बंदरों की समस्या से निजात दिलाने के लिए योजना तैयार की जाएगी। इनको पकड़वाकर सुरक्षित स्थानों पर छोड़ा जाएगा।- रमेश सैनी, नगरपालिका प्रधान महेंद्रगढ़।
फोटो संख्या:-60 हिंसक हुए बंदरों ने शॉपिंग कॉम्प्लेक फेज नंबर को रोका रास्त दूर खड़े लोग---स्रो
फोटो संख्या:-60 हिंसक हुए बंदरों ने शॉपिंग कॉम्प्लेक फेज नंबर को रोका रास्त दूर खड़े लोग---स्रो
फोटो संख्या:-60 हिंसक हुए बंदरों ने शॉपिंग कॉम्प्लेक फेज नंबर को रोका रास्त दूर खड़े लोग---स्रो
फोटो संख्या:-60 हिंसक हुए बंदरों ने शॉपिंग कॉम्प्लेक फेज नंबर को रोका रास्त दूर खड़े लोग---स्रो
फोटो संख्या:-60 हिंसक हुए बंदरों ने शॉपिंग कॉम्प्लेक फेज नंबर को रोका रास्त दूर खड़े लोग---स्रो