फोटो 02 अपनी यूनिट में मशीन पर काम करती मनीषा। संवाद
अरविन्द तक्षक नारनौल। कोरोना महामारी के दौरान जब लॉकडाउन से हजारों लोगों का रोजगार प्रभावित हुआ, तब गांव पृथ्वीपुरा की रहने वाली मनीषा ने हार मानने के बजाय नया हुनर सीखने का फैसला किया। आज उसी हुनर से हाउसकीपिंग उत्पाद बनाकर कई परिवारों की रोजी-रोटी का आधार बन चुकी हैं। लॉकडाउन के दिनों में मनीषा ने यूट्यूब पर हाउसकीपिंग उत्पाद बनाने के वीडियो देखने शुरू किए। कई महीनों तक लगातार सीखने और अभ्यास करने के बाद उन्होंने वर्ष 2021 में घर पर पहला टॉयलेट क्लीनर तैयार किया।
इसका इस्तेमाल सफल रहा और पड़ोस की महिलाओं ने भी इसकी खूब सराहना की। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने सर्फ, हैंडवॉश, फ्लोर क्लीनर और डिशवॉश जैसे कई इको-फ्रेंडली उत्पाद बनाने शुरू कर दिए हैं।
मनीषा की मेहनत देखकर उनके पति विजय ने उन्हें अपना उद्योग शुरू करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश की एक कंपनी से तीन महीने का ऑनलाइन प्रशिक्षण भी लिया। करीब चार साल की मेहनत के बाद उन्होंने एमएसएमई योजना के तहत सात लाख रुपये का ऋण लेकर दो मशीनें खरीदीं और मार्च 2024 में अपना लघु उद्योग शुरू किया।
आज उनका कारोबार लगातार बढ़ रहा है। छोटे स्तर से शुरू हुआ यह काम अब कई क्षेत्रों तक पहुंच चुका है। उनके उद्योग में सात लोगों को रोजगार मिला हुआ है।
मनीषा बताती हैं कि सभी खर्च निकालने के बाद हर महीने करीब 50 हजार रुपये की बचत हो जाती है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि सीखने की इच्छा, मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर किसी भी चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है। संवाद
फोटो 02 अपनी यूनिट में मशीन पर काम करती मनीषा। संवाद