फोटो नंबर-17महेंद्रगढ़ रोड़ पर मॉल को सील करते नप कर्मचारी। संवाद
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नारनौल। नारनौल नगर परिषद ने पूर्व डिप्टी स्पीकर संतोष यादव के भाई लाजपत यादव के मॉल को सील कर दिया। ईओ सुशील कुमार ने कार्रवाई की वजह बिल्डिंग प्लान और सीएलयू पास नहीं होना बताई है। लाजपत यादव का आरोप है कि यह सब संतोष के साथ चल रहे विवाद के दबाव में किया गया है। हालांकि संतोष यादव ने इस आरोप को नकार दिया। बहरहाल, मॉल के 200 वर्कर के आगे रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
दोपहर 2 बजे थे। महेंद्रगढ़ रोड स्थित 4U मॉल में खूब चहल-पहल थी। लोग खरीदारी में जुटे थे, लेकिन इसी बीच यहां पुलिस बल ने दस्तक दी। इससे पहले कि किसी को कुछ समझ में आता, पुलिस ने लोगों को बाहर निकालना शुरू कर दिया। थोड़ी ही देर बाद यहां सन्नाटा पसर गया। मॉल सील जो हो चुका था।
ऐसा क्यों हुआ?
ऐसा क्यों हुआ? इसका जवाब नगर परिषद अपने हिसाब से दे रही है। की गई है। सीलिंग टीम का नेतृत्व कर रहे परिषद के ईओ ईओ सुशील कुमार ने बताया कि मॉल का बिल्डिंग प्लान और सीएलयू पास नहीं है। इसके चलते मॉल को सील किया गया तो मालिक लाजपत यादव कोर्ट पहुंच गए थे। कोर्ट ने मॉल के मालिक को दो साल का वक्त दिया था। 4 नवंबर को यह मोहलत खत्म हो चुकी है। 5 नवंबर को नोटिस भी जारी कर दिया गया था। 7 नवंबर को कोर्ट ने कहा कि नगर परिषद अपनी कार्रवाई करे। इसके बाद म्यूनिसिपल एक्ट के तहत यह कार्रवाई की गई है।
राजनीतिक दबाव पर भाई-बहन आमने-सामने
मॉल के मालिक लाजपत यादव ने बताया कि उनका बहन संतोष यादव के साथ प्रॉपर्टी का विवाद चल रहा है। नगर परिषद के खिलाफ मामला कोर्ट में चल रहा है। स्टेटस-को भी मिला हुआ है। औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। डीटीपी कार्यालय में सीएलयू की प्रक्रिया चल रही है। आज दोपहर बाद सुनवाई भी थी, लेकिन इससे ठीक पहले नगर परिषद ने मॉल को सील कर दिया। यह कार्रवाई राजनीतिक दबाव में की गई है। लाजपत यादव ने तो यहां तक भी कह दिया कि मॉल के पीछे बन रहे भाजपा के दफ्तर की भी जांच होनी चाहिए कि क्या सभी शर्तें पूरी हैं। उधर, पूर्व डिप्टी स्पीकर संतोष यादव ने राजनीतिक दबाव या हस्तक्षेप इनकार कर दिया है। फिलहाल मॉल सील है।
अब आगे क्या?
बता देना जरूरी है कि लाजपत यादव के यह मॉल करीब सात साल में बना है। अब दो अक्तूबर को इसमें एक बड़ा शोरूम खोला गया था। इसका लाखों रुपये का सामान अब अंदर ही बंद हो गया। सीलिंग के दौरान यहां 200 वर्कर मौजूद थे। उन्होंने नाराजगी जताई है कि बिना पूर्व सूचना के की गई इस कार्रवाई से उनकी आजीविका संकट में आ गई। प्रशासनिक टीम का कहना है कि सीएलयू और बिल्डिंग प्लान की मंजूरी के बाद ही खुलेगा।