संवाद न्यूज एजेंसी
कनीना। हर व्यक्ति के हृदय में अच्छे व बुरे विचारों का मंथन होता है। जो व्यक्ति अच्छे विचारों से बुराई पर विजय प्राप्त करता है, उसका जीवन सुखमय बन जाता है। मनुष्य को अच्छे विचारों से अपना जीवन सुखमय बनाना चाहिए। ये बातें आचार्य भारत शास्त्री बरसाना वाले ने गांव ककराला में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन समुद्र मंथन की कथा सुनाते हुए कहीं।
उन्होंने कहा कि मानव हृदय ही संसार सागर है। मनुष्य के अच्छे और बुरे विचार ही देवता और दानव के द्वारा किया जाने वाला मंथन है। कभी हमारे अंदर अच्छे विचारों का चिंतन मंथन चलता रहता है और कभी हमारे ही अंदर बुरे विचारों का चिंतन मंथन चलता रहता है। जिसके अंदर के दानव जीत गया उसका जीवन दुखी, परेशान और कष्ट कठिनाइयों से भरा होगा और जिसके अंदर के देवता जीत गया उसका जीवन सुखी, संतुष्ट और भगवत प्रेम से भरा हुआ होगा। हमेशा अपने विचारों पर पैनी नजर रखते हुए बुरे विचारों को अच्छे विचारों से जीतते हुए अपने मानव जीवन को सुखमय एवं आनंद मय बनाना चाहिए। कथा के प्रारंभ में भागवत भगवान का पूजन कर आरती उतारी गई।
इस दौरान पंचायत समिति चेयरमैन जयप्रकाश यादव, महेंद्र सिंह, ओमप्रकाश फौजी, विजय सिंह, नरेंद्र फौजी, संतलाल नंबरदार, रामकिशन, दिनेश सोनी, इंस्पेक्टर राजवीर सिंह, कृष्ण कुमार, उमेद सिंह मौजूद रहे।