पटियाला रियासत के समय का जिला महेंद्रगढ़ अपने हकों के लिए काफी समय से तरस रहा है। महेंद्रगढ़ जिला होते हुए भी उसके साथ सौतेला व्यवहार हो रहा है। क्षेत्र को उसका हक न मिलने पर न केवल विकास की दृष्टि से पिछड़ा रहा है बल्कि बेरोजगारी से भी जूझ रहा है। आज भी पिछड़ेपन का दाग उसके माथे पर लगा है।
एक समय महेंद्रगढ़ काफी बड़ा जिला हुआ करता था और हरियाणा बनने के बाद भी महेंद्रगढ़ सात जिलों में से एक था। समय-समय पर सरकारों ने अपने मतलब के लिए इसके हिस्से को कम कर दिया। एक जमाना था जिस समय चरखी दादरी ओर रेवाड़ी महेंद्रगढ़ जिले में आता था लेकिन आज चरखी दादरी जिला बनने जा रहा है और रेवाड़ी अलग होने के बाद एक विकसित जिला है। जो जिले इससे अलग हुए थे वो आज उससे कहीं बेहतर हैं लेकिन महेंद्रगढ़ आज भी वैसा ही है। जिले का हेड क्वार्टर नारनौल होने की वजह से लोगों को सरकारी काम के लिए नारनौल जाना पड़ता है।
ब्राह्मणों ने बसाया था कानौड़
कानौडिया ब्राह्मणों द्वारा आबाद किए जाने कि वजह से महेंद्रगढ़ शहर पहले कानौड़ के नाम से जाना जाता था। कहा जाता है कि बाबर के एक सेवक मलिक महदूद खान ने बसाया था। सत्रहवीं शताब्दी में मराठा शासक तात्या टोपे ने यहां एक किले का निर्माण करवाया था। 1861 में पटियाला रियासत के शासक महाराज नरेंद्र सिंह ने अपने पुत्र मोहिंद्र सिंह के स मान में इस किले का नाम महेंद्रगढ़ रख दिया था। इसी किले के नाम कि वजह से इस नगर को महेंद्रगढ़ के नाम से जाना जाने लगा और नारनौल निजामत का नाम बदल कर महेंद्रगढ़ निजामत रख दिया गया।
1948 में बना था जिला
1948 में पटियाला रियासत की नारनौल तथा महेंद्रगढ़ तहसील, जींद रियासत की दादरी (चरखी दादरी) तहसील तथा नाभा रियासत की बावल निजामत का कुछ हिस्सा मिलाकर महेंद्रगढ़ जिले का गठन किया गया और नारनौल को जिला मुख्यालय बनाया गया।
1948 में महेंद्रगढ़ जिले के गठन के बाद से जिलो के पुर्नगठन व नए जिले बनने की वजह से महेंद्रगढ़ की भौगोलिक सीमाओं में अनेक बार परिवर्तन किए गए हैं। 1989 में रेवाड़ी को नया जिला बनाने के बाद महेंद्रगढ़ जिले की भौगोलिक सीमाओं में परिवर्तन हुआ है।
पहले उपायुक्त ने दिया था हेड क्वार्टर का ऑफर
महेंद्रगढ़ के पहले जिला उपायुक्त आरएस पल्टा ने 1953 में महेंद्रगढ़ को जिला हेड क्वार्टर यहां बनाने का ऑफर दिया था। उस समय महेंद्रगढ़ पटियाला रियासत का ही हिस्सा था। जिला उपायुक्त ने उस दौरान कहा था कि यह बिल्डिंग उसे कार्यालय के लिए दे दें तो वे हैड ऑफिस यहीं स्थापित कर देंगे। यह बिल्डिंग आज भी महेंद्रगढ़ में राजा मैरिज पैलेस के पास स्थित है। हवेली मालिक ने शहरवासियों ने भड़का दिया और उसने हवेली देने से मना कर दिया उसके बाद यह हेड ऑफिस नारनौल स्थापित कर दिया गया। उसके बाद हरियाणा पंजाब से अलग राज्य बन गया लेकिन महेंद्रगढ़ को हेड क्वार्टर नहीं मिला।
पहले सात जिलों में था महेंद्रगढ़
1 नवंबर 1966 को हरियाणा जब पंजाब से अलग हुआ था उस समय प्रदेश के सात जिले हिसार, जींद, रोहतक, गुड़गांव, महेंद्रगढ़, अंबाला आदि थे। उस समय रेवाड़ी और चरखी दादरी भी महेंद्रगढ़ का हिस्सा था लेकिन जैसे-जैस आगे जिले बनते गए वैसे-वैस महेंद्रगढ़ जिला क्षेत्रफल की दृष्टि से छोटा होता चला गया।