फोटो संख्या:69- महेंद्रगढ़ का किला--संवाद
महेंद्रगढ़। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान माने जाने वाले महेंद्रगढ़ और माधोगढ़ के किले आज उपेक्षा और बदहाली के कारण अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। कभी शौर्य और गौरव के प्रतीक रहे ये किले अब संरक्षण के अभाव में धीरे-धीरे जर्जर होते जा रहे हैं।
महेंद्रगढ़ किले का निर्माण 1755 में मराठा काल में तात्या टोपे की ओर से करवाया गया था। बाद में 1861 में पटियाला के महाराजा नरेंद्र सिंह ने अपने पुत्र महेंद्र सिंह के नाम पर इसका नामकरण किया जिसके बाद ही इस क्षेत्र को महेंद्रगढ़ की पहचान मिली। इसी किले के नाम पर जिले का नाम भी पड़ा।
आज यह ऐतिहासिक धरोहर प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है। किले की दीवारें टूटने लगी हैं और परिसर में गंदगी फैली हुई है। लगभग 9 करोड़ रुपये की लागत से इसे हेरिटेज पर्यटन स्थल और हेरिटेज होटल के रूप में विकसित करने की योजना शुरू की गई थी लेकिन काम लंबे समय से ठप पड़ा है।
इतिहास की धरोहर माधोगढ़ किला भी बदहाल
अरावली की पहाड़ियों में स्थित माधोगढ़ किला भी अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। 18वीं शताब्दी में शेखावत राजपूतों द्वारा निर्मित यह किला बाद में मराठा साम्राज्य का हिस्सा बना। किले के भीतर स्थित रानी महल और रानी तालाब जो कभी अपनी भव्यता के लिए प्रसिद्ध थे अब खंडहर में बदलते जा रहे हैं। एक दशक से दोनों किलों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजनाएं केवल कागजों तक सीमित हैं।
फोटो संख्या:69- महेंद्रगढ़ का किला--संवाद