फोटो संख्या:64- गांव खातोद में श्रद्धालुओं को कथा सुनाते पंडित कुलदीप भारद्वाज--स्रोत- आयोजक
महेंद्रगढ़। गांव खातोद में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथाव्यास पंडित कुलदीप भारद्वाज ने विदुर प्रसंग में भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम की व्याकुलता के बारे में बताते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण विदुर जी की कुटिया में भोजन करने गए।
वहां केले के छिलकों का भोग स्वीकारा। इससे पहले भगवान श्रीकृष्ण दुर्योधन के महल में छप्पन भोग का त्याग कर आए थे। भगवान तो प्रेम के भूखे होते हैं और विदुर-विदुरानी ने भगवान को प्रेम से भोजन करवाया तो उन्होंने केले के छिलके भी प्रेम से खा लिए थे। मनुष्य जीवन में जाने अनजाने प्रतिदिन कई पाप होते है। उनका ईश्वर के समक्ष प्रायश्चित करना ही एक मात्र मुक्ति पाने का उपाय है। उन्होंने ईश्वर आराधना के साथ अच्छे कर्म करने का आह्वान किया है। कथा व्यास ने कहा कि प्रभु जब अवतार लेते हैं तो माया के साथ आते हैं। साधारण मनुष्य माया को शाश्वत मान लेता है और अपने शरीर को प्रधान मान लेता है। जबकि शरीर नश्वर है। गांव सरपंच सतीश कुमार, मनीष कुमार, सुभाष शर्मा, रोहताश शर्मा ने बताया कि गांव के प्राचीन मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा प्रतिदिन 12 बजे से तीन बजे तक चलेगी। कथा वाचक पंडित कुलदीप भारद्वाज महाराज की ओर से कथा के नियमों के साथ-साथ कथा का रसपान करवाया जा रहा है। श्रीमद्भागवत कथा 13 जनवरी को हवन कर प्रसाद वितरित किया जाएगा।