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बिना लाइसेंस का ‘आरओ’ का पानी मिलेगा महंगा

Wed, 25 May 2016 11:58 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला
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पानी पर महंगाई - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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चिल्ड और आरओ के नाम पर बेचा जाने वाला शुद्ध पानी एक जून से 350 रुपया प्रति कैंपर प्रति माह मिलेगा। अभी तक विभिन्न नामों से 250-300 रुपये प्रति कैंपर प्रति माह बेचा जा रहा है। गर्मियां शुरू होते ही बेशक पानी का काम करने वालों का धंधा चमक गया है लेकिन लोगों के स्वास्थ्य से होने वाले खिलवाड़ से सभी पल्ला झाड़ रहे हैं। वर्तमान में शहर में करीब 19 प्लाटों से करीब छह हजार कैंपर रोजाना सप्लाई की जाती है। जानकारी के अनुसार आरओ के नाम पर अधिकांश सप्लायर लोगों को सामान्य पानी ठंडा करके पिला रहे हैं। कम गुणवत्ता के कारण जल जनित बीमारियां फैलने का डर बना हुआ है। लाइसेंस की बात करें तो विभाग के अधिकारी कहते हैं कि किसी भी आरओ प्लांट ने लाइसेंस नहीं लिया है जबकि यूनियन के प्रधान का कहना है कि कुछ के लाइसेंस रिन्यू होने हैं।   
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स्वास्थ्य विभाग की माने तो कैंपर द्वारा सप्लाई होने वाला पानी पीने योग्य नहीं है। इनके पानी में जल जनित बीमारियां के बैक्टीरिया पाए जाते हैं। इसमें पीलिया, हैजा, डायरिया और टाइफाइड जैसी बीमारियां हो सकती हैं। नारनौल शहर और आसपास 19 वाटर सप्लाई के प्लांट लगे हैं। इन प्लांटों से पानी लेकर कैंपर द्वारा शहर में वाटर सप्लाई का कार्य किया जाता है। पानी के कैंपर दुकानदारों, व्यवसायिक संस्थानों के अलावा अब घरों में भी पहुंचने लगा है। सप्लायर सुबह कैंपर भरकर लाते हैं, शाम के समय कैन वापस ले जाते हैं। कई वाटर सप्लायर तो छोटे ट्रैक्टर या किसी वाहन में एक टंकी चिल्ड पानी की भरकर लाते हैं। दुकान से कैन लेकर उनमें पानी भर दिया जाता है।

घरों में भी पहुंचने लगे हैं कैंपर
दुकानों और व्यवसायिक संस्थानों के साथ-साथ कुछ लोग शहर में आ रहे गंदे पानी के कारण घरों में भी कैंपर मंगवाने लगे हैं। सप्लायर का दावा है कि वे फिल्टर और चिल्ड वाटर सप्लाई करते हैं। इस कारण लोग उनका पानी लेना पसंद कर रहे हैं, परंतु स्वास्थ्य विभाग की माने तो इनके द्वारा सप्लाई हो रहा पानी मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है।
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चार वाटर प्लांट हुए थे सील
पानी में गुणवत्ता की कमी के चलते स्वास्थ्य विभाग ने मई 2012 में दो वाटर सप्लायर के प्लांटों को सील किया था। कुछ दिन बाद ये फिर से शुरू हो गए। इसके बाद जून 2012 में भी दो अन्य प्लांटों को सील किया गया था। विभाग के अनुसार उस समय सील किए प्लांटों के सैंपल लिए गए थे। इसके बाद रोहतक स्थित लैब में जांच के बाद पाया गया कि इनका पानी मनुष्य के पीने योग्य नहीं है।

रोजाना पांच से छह हजार कैन होते हैं सप्लाई
जानकारी के मुताबिक पांच से छह हजार के करीब कैन शहर में रोजाना सप्लाई होते हैं। इनमें यादव वाटर सप्लाई के 300, चारू वाटर सप्लायर के 400, सैनी वाटर सप्लायर के 300, जीण भवानी के 250, पूजा वाटर सप्लाई के 400, दुर्गा वाटर सप्लायर के 200, श्री श्याम वाटर सप्लायर के 250, बालाजी, न्यू बाला जी और श्याम वाटर सप्लायर के 200-200 कैन रोजाना शहर में सप्लाई होते हैं। इनके अलावा अन्य कई वाटर सप्लायर कैन भी शहर में सप्लाई होते हैं।

महेंद्रगढ़ में 2000 कैंपर सप्लाई हो रहे रोजाना
महेंद्रगढ़ शहर की बात की जाए तो यहां पर पानी का धंधा करने वाले तीन प्लांटों के करीब 2000 कैन रोजाना बाजार में सप्लाई हो रहे हैं। इनमें चारु और सांवरिया वाटर सप्लाई के कैन सबसे अधिक सप्लाई होते हैं। जानकारी के अनुसार इन प्लांटों में से एक या दो प्लांट वाले ही रोजाना आरओ से पानी शुद्ध करते हैं। अन्य प्लांट वाले केवल पानी को चिल्ड कर बड़ी-बड़ी प्लास्टिक की टंकियों में डालकर उसे सप्लाई कर देते हैं।ट
वे केवल डब्बा बंद या पैक सामान के ही सैंपल लेते हैं। पानी के कैंपरों के सैंपल लेने का उनके पास कोई अधिकार नहीं है।
- एनडी शर्मा, डीएफएसओ, नारनौल

कोट
अधिकतर सप्लायर ने लाइसेंस लिया हुआ है। कुछ ने लाइसेंस रिन्यू नहीं करवाया होगा। इसे जल्द ही रिन्यू करवा लिया जाएगा। एक जून के बाद सभी कैंपर सप्लायर 350 रुपये प्रति कैंपर हर माह के हिसाब से ही पानी की आपूर्ति करेंगे। - रविंद्र कुमार, प्रधान आरओ वाटर यूनियन, नारनौल
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