फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पानी के रूप में धीमा जहर पीने को मजबूर हैं लोग

Tue, 24 May 2016 01:14 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला
विज्ञापन
पानी पीना
विज्ञापन
नारनौल शहर सहित उपमंडल के अनेक गांवों में ट्यूबवेलों से आपूर्ति किए जाने वाले पानी  में फ्लोराइड की की मात्रा बहुत अधिक है। यहां का भूमिगत पेयजल पीने लायक  नहीं रहा है। इस बारे में स्वास्थ्य विभाग ने भी ऐतिहात बरतने की गाइड लाइन  जारी की हुई है। मगर मजबूरी में लोग लोग हानिकारक पानी पी रहे हैं। इस  पानी के लगातार सेवन से क्षेत्र के लोगों को न केवल दांतो, बल्कि हड्डियों व  जोड़ों की विभिन्न असाध्य बीमारियों से जूझना पड़ रहा है। 
विज्ञापन


गांवों में फ्लोराइड की मात्रा अधिक
नारनौल शहर  के अलावा आसपास के अनेक गांवों में भी भूमिगत जल में फ्लोराइड की मात्रा  खतरनाक सीमा तक बढ़ी हुई पाई गई है। यहां करीब तीस से अधिक गांवों में  फ्लोराइड की मात्रा एक मिलीग्राम से अधिक है, जो सेवन के लिए खतरनाक मानी  जाती है। वहीं आठ गांवों में तो यह मात्रा पांच मिलीग्राम से भी अधिक हो गई  है। जो बहुत ही खतरनाक है।

धीमा जहर है फ्लोराइड युक्त पानी 
चिकित्सकों  के अनुसार फ्लोराइड युक्त पानी के लगातार सेवन से यह पानी लोगों के लिए  धीमा जहर जैसा साबित हो रहा है। वैसे तो स्वास्थ्य विभाग भी इस बात से  अनभिज्ञ नहीं है, क्योंकि विभाग द्वारा स्वयं भी पानी में फ्लोराइड की  मात्रा की समय-समय पर जांच कराई जाती है। इसके बावजूद स्वच्छ पेयजल उपलब्ध न  कराकर विभाग ने यहां के लोगों के स्वास्थ्य को भगवान भरोसे छोड़ रखा है।  चिकित्सकों के अनुसार पीने के पानी में फ्लोराइड की मात्रा प्रति लीटर एक  मिलीग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए। इसके बावजूद नारनौल शहर तथा आसपास के  गांवों के भूमिगत जल में पाई जाने वाली फ्लोराइड की मात्रा का प्रतिशत काफी  अधिक व चौंकाने वाला है।
विज्ञापन


क्या होता है फ्लोराइड होने से
फ्लोराइड होने  से दांतों में पीलापन, हड्डियों में टेढ़ापन, जोड़ों में दर्द तथा अकडन के  अलावा अनिमिया, अब्रोसन, नपुंसकता व बच्चों का आई क्यू कम हो जाता है।  इसके अलावा अन्य कई बीमारियां भी हो जाती हैं।

फ्लोराइड से बचाव 
कम फ्लोराइड वाला पानी पीयें,  कम फ्लोराइड वाले खाद पदार्थ लें, दूध, दही, हरी सब्जी व खट्टïे फल का सेवन करें। 

इनसे भी होता है फ्लोराइड
फ्लोरोइड होने  का मुख्य कारण फ्लोराइड युक्त दूध है। इसके अलावा बिना दूध की चाय पीने,  काला नमक, तंबाकू, सुपारी व फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट से भी फ्लोराइड हो  जाता है। 

कहां कितनी है मात्रा 
गांव         मात्रा एमजी/प्रति लीटर 
भूषण खुर्द       3.1
कांवी            3.1
इकबालपुर नंगली  3.1
नांगल शालू     3.1 
नूनी अव्वल     3.2
पटीकरा         3.2
सीहमा          3.2
रामपुरा          3.3
पाली           3.3
मंडलाना        3.3
बापड़ोली       3.7
कालबा         3.7
निजवाजगर     6.4
निम्हेड़ा         4.1
हाजीपुर         4.3
पहाड़ावास       4.4
पुरानी मंडी नारनौल   5.4
मकसूसपुर           4.5
मुरारीपुर कांवी      6.62
मुलोदी             5.1
भोजावास          5.6
भुंगारका            6.4
बास किरारोद       6.6
नांगल मित्रपुरा      7.4
माली टिब्बा        4.2
आंकड़े 2015 के स्वास्थ्य व जनस्वास्थ्य विभाग के सर्वे के हैं

दंत  चिकित्सक डा. गजराज के अनुसार फ्लोराइड की मात्रा पानी में अधिक होने से  अनेक प्रकार की बीमारियां दांतों व शरीर में हो सकती है। इसलिए इससे बचाना  भी बहुत जरूरी है। 
वहीं डा.सुरेंद्र यादव का कहना है कि पेयजल में पाई  जा रही फ्लोराइड व टीडीएस की अत्यधिक मात्रा के कारण यहां के लोगों में  दांतों की बीमारियों के अलावा हड्डियों तथा जोड़ों के रोगियों की संख्या  निरंतर बढ़ रही है।

आरओ व केनाल बेस पानी है समस्या का समाधान
जनस्वास्थ्य विभाग  के अधिकारियों के अनुसार समय-समय पर विभाग द्वारा फ्लोराइड की मात्रा की  जांच की जाती है। इसके अलावा इसको रोकने के उपाय भी विभाग द्वारा किए जाते  हैं। उन्होंने बताया कि इसको रोकने के लिए आरओ व केनाल बेस वाटर सप्लाई  सबसे उपयुक्त उपाय है।

फ्लोराइड दुधारी तलवार है। इसके ज्यादा सेवन से  जहां अनेक बीमारियां होती हैं, वहीं यह अगर शरीर में नहीं भी जाए तो भी  बीमारी हो सकती है। प्रति लीटर पानी में एक एमजी फ्लोराइड की मात्रा तक ठीक  है। इससे अधिक मात्रा से कई बीमारियां हो सकती हैं। नारनौल शहर व आसपास के  गांवों का पानी पीने योग्य नहीं है। इससे बचाव के लिए समय-समय पर लोगों को  कैंप आदि लगाकर जानकारी दी जाती है।
विज्ञापन

संजय यादव, जिला परामर्शदाता,  एनपीपीसीएफ, स्वास्थ्य विभाग
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें