जाट आरक्षण को लेकर सरकार गंभीर नहीं, बरगलाने के मकसद से वार्ता का नाटक किया जा रहा है। लेकिन जाट बिरादरी को आरक्षण से कम कुछ भी मंजूर नहीं। साथ ही सरकार को दर्ज मुकदमे वापस लेने होंगे। यह बात आरक्षण समिति के राष्ट्रीय सचिव हजारीलाल लंबोरा व जिला प्रधान कवरसिंह ने धरने को संबोधित करते हुए कहा।
उन्होंने कहा कि फरवरी 2016 में करीब 25 दिन लंबा आंदोलन हो चुका है। जिसे कुचलने के लिए सरकार द्वारा बल प्रयोग किया गया। आरक्षण के आंदोलन में समाज के करीब 21 लोगों को जान गंवानी पड़ी। सैकड़ों लोगों पर संगीन धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज कर लिए गए, जिनमें जमानत मिलने का प्रावधान नहीं है। उस दौरान अधूरी प्रक्रिया के तहत आरक्षण मुहैया करवाया गया। जिसके खिलाफ असंतुष्ट लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। सुनवाई बाद उच्च न्यायालय ने आरक्षण पर रोक लगा दी। उन्होंने कहा कि बिरादरी के लोग बलिदान दे चुके है अब सैकड़ों लोगों को जेल में डालने की योजना है। जिससे जाट बिरादरी में आक्रोश बना हुआ है। धरने के 14 दिन बीतने के बावजूद सरकार का रवैया सकारात्मक नहीं। वार्ता में उलझाकर जाटों को भटकाने का प्रयास हो रहा है। सरकार को किसी भी सूरत में मुकदमे वापस तथा आरक्षण की सक्रिय पैरवी का लिखित आश्वासन देना होगा, अन्यथा लोग धरने पर डटे रहेंगे।