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Mahendragarh-Narnaul News: इस्लामपुर किला और मिर्जा अलीजान बावड़ी का होगा जीर्णोंद्धार

Sun, 06 Jul 2025 10:51 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
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फोटो 5मिर्जा अलीजान की बावड़ी।
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नारनौल। जिले में ऐतिहासिक स्थलों को संवारने के लिए प्रशासन लगातार कार्य कर रहा है। अब इस्लामपुरा किला पर करीब 3.81 करोड़ और मिर्जा अलीजान तख्त और बावड़ी पर 4.46 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
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इसका पीडब्ल्यूडी की तरफ से टेंडर भी जारी कर दिया गया है। इस्लामपुरा किला सरेली और इस्लामपुरा के खेतों के बीच बना है, जो इन दिनों खंडहर हो चुका है। करीब सात माह पहले हरियाणा सरकार ने संरक्षित स्मारक क्षेत्र के रूप में घोषित भी किया था। अब इसके पुनरोद्धार के लिए टेंडर भी जारी कर दिया है।
ऐसे में गुमनाम हो चुका किला अब फिर से जिले की शोभा बढ़ाएगा। यह किला गांव इस्लामपुर में 17वीं-18वीं शताब्दी में बना था। किले की जमीन 8 कनाल 15 मरला है, जिसका स्वामित्व हरियाणा सरकार के पास है। यह एक वर्गाकार किला है जो दो गांव इस्लामपुर और सरेली के बीच खेतों में स्थित है।
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इस किले में केवल एक ही प्रवेश द्वार है। किले की ऊंची दीवारों के प्रत्येक कोने पर बुर्ज है। किले के अंदर कमरों के अवशेष मिलते हैं। इसके ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए सरकार ने इसे संस्मारक, पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम के तहत संरक्षित किया है। मिर्जा अली जान की बावड़ी पर 4.46 करोड़ रुपये ओर खर्च किए जाएंगे। इससे आने वाले दिनों में लोगों काे बावड़ी का नया रूप देखने के मिलेगा। इससे पहले भी सरकार की तरफ से बावड़ी के जीर्णोंद्धार के लिए बजट जारी किया गया था। इसके बाद पीडब्ल्यूडी की तरफ से टेंडर जारी कर कार्य करवाया गया था।
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धूरस पत्थरों के आठ खंभों पर स्थित है बावड़ी
बावड़ी शहर के छोटा बड़ा तालाब के समीप स्थित है। शहर के उत्तर पश्चिम में बनी इस बावड़ी में एक विशाल धनुषाकार प्रवेशद्वार के रूप में इमारत के मुख्य ढांचे पर आयताकार छतरी के साथ एक तख्त भी स्थित है। इस छतरी में एक सजाया हुआ प्रालंब है, जो धूरस पत्थरों से बने आठ खंभों पर रहकर सभी दिशाओं में खुला हुआ है। नीचे सीढ़ियों के साथ छज्जा भी है। बावड़ी के मुख्य धनुषाकार प्रवेशद्वार पर तख्त स्थित है। दक्षिण में मुख्य धनुषाकार प्रवेशद्वार तीन मंजिला बावड़ी और एक कुएं के साथ जुड़ा हुआ है।

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दोनों ऐतिहासिक स्थलों के पास खनन और निर्माण पर प्रतिबंध
जिले के ऐतिहासिक स्मारकों के आसपास के क्षेत्र को पुरातात्विक महत्व को देखते हुए निषिद्ध एवं विनियमित क्षेत्र घोषित किया गया है। इन दोनों ऐतिहासिक स्मारकों और स्थलों की संरक्षित सीमा से 15 मीटर तक के क्षेत्र को निषिद्ध क्षेत्र घोषित किया गया है, जबकि इससे आगे साथ लगते 30 मीटर को खनन कार्यों और निर्माण के प्रयोजनों के लिए विनियमित क्षेत्र घोषित किया गया है।


वर्जन:

मिर्जा अलीजान की बावड़ी के लिए 4.46 करोड़ और इस्लामपुरा किला के जीर्णोंद्धार के लिए 3.81 करोड़ रुपये के टेंडर जारी किए गए हैं। मिर्जा अलीजान की बावड़ी का पहले से कार्य किया जा रहा है। इसका कुछ कार्य बच गया था।-जितेंद्र कुमार, जेई पीडब्ल्यूडी नारनौल।
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