छत्तीसगढ़ नसबंदी कैंप में 14 महिलाओं की मौत के बाद भी स्वास्थ्य विभाग और अधिकारी नहीं चेते। इतनी बड़ी घटना के बाद भी विभाग के अधिकारी लापरवाही बरत रहे हैं। ऐसा ही मामला महेंद्रगढ़ के सामान्य अस्पताल में लगाए गए नसबंदी कैंप में सामने आया है।
कैंप में 110 महिलाओं का रजिस्ट्रेशन किया गया और 60 महिलाओं को बेहोशी (प्री एनेस्थिसिया, लोकल) का इंजेक्शन दिया गया, जबकि आपरेशन केवल 30 महिलाओं के ही किए गए। इसके बाद भी इतनी बड़ी लापरवाही बरती गई कि अस्पताल में सभी बेड खाली पड़े थे और आपरेशन करने के बाद महिलाओं को खेल ग्राउंड में जमीन पर लेटा दिया। इसके बाद कुछ महिलाओं की तबियत बिगड़ गई और परिजनों ने हंगामा कर दिया। हंगामे के बाद महिलाओं को बेड पर शिफ्ट किया गया।
सामान्य अस्पताल में हर बृहस्पतिवार को नसबंदी का कैंप लगाया जाता है। सुबह से काफी संख्या में महिलाएं नसबंदी के लिए अस्पताल पहुंची। इसमें 110 महिलाओं के रजिस्ट्रेशन के बाद 60 महिलाओं को प्री एनेस्थीसिया (बेहोशी) का इंजेक्शन दिया गया। करीब तीन बजे सर्जन डा. पंवार ने 30 महिलाओं का आपरेशन करने के बाद रेवाड़ी के लिए रवाना हो गए। आपरेशन के बाद महिलाओं को बेड पर लेटाने की बजाए स्टाफ ने अस्पताल के अंदर ही खेल ग्राउंड में ही जमीन पर दरी बिछा कर महिलाओं को लेटा दिया गया।
करीब दो घंटे तक महिलाएं यहीं पर लेटी रही। अहम बात यह है कि यहीं पर सीवर का कनेक्शन भी है, इससे किसी भी महिला को इंफेक्शन हो सकता था। उधर, इंजेक्शन के बाद कई महिलाओं की तबियत खराब हो गई। डाक्टर के जाने के बाद महिलाओं व उनके परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। करीब दो घंटे तक महिलाओं ने प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और भड़ास निकाली।
कई महिलाओं की तबियत बिगड़ी
इंजेक्शन लगाने के बाद कई महिलाओं की तबियत बिगड़ गई। कई महिलाओं को उल्टी और बीपी की शिकायत हो गई। आनन फानन में महिलाओं का चेकअप किया गया व उनका इलाज शुरू किया गया। पूनम, रेखा, कमला देवी झगड़ौली, वीना आदि की तबियत खराब हो गई। परिजन कई महिलाओं को निजी अस्पताल में ले गए।
ऐसे तो पशुओं का भी इलाज नहीं होता
चंद्रवीर निवासी खेड़ा, सतबीर बलाना का कहना है कि इस प्रकार तो पशुओं का भी इलाज नहीं होता। वे अपनी पत्नी का आपरेशन कराने के लिए आए थे, उन्हे इंजेक्शन तो दे दिया गया पर आपरेशन से इंकार कर दिया गया, अब उन्हें अगले सप्ताह आना होगा। परेशानी उठानी पड़ी अलग। राजबाला, ललिता, अनिता का कहना है कि जब आपरेशन तीस के ही करने थे तो इतनी महिलाओं का रजिस्ट्रेशन क्यों किया गया व 60 को इंजेक्शन क्यों दिया गया?
एसएमओ को खरी खरी
मीडिया के पहुंचने के बाद आनन फानन में अस्पताल स्टाफ ने महिलाओं को खाली बेड पर शिफ्ट किया। काफी संख्या में महिलाओं के परिजन एसएमओ डा. अश्वनी रोहिल्ला के आफिस पहुंच गए और उन्हें अपनी समस्या बताने लगे। कई महिलाओं ने तो एसएमओ को भी नहीं बख्शा और खरी खरी सुनाई। महिलाओं ने कहा कि जब आपके पास कोई सुविधा ही नहीं है तो बाहर क्यों नहीं लिख देते कि यहां पर इलाज नहीं किया जाता। बाद में एसएमओ ने महिलाओं को समझाया।