ये कैसे अच्छे दिन है भाई? पहले भी इसी तरह लाइनों में लगते थे, ब्लैक में बीज बिकता था और ब्लैक में खाद। आज भी हालात वहीं है, किसान पहले भी पीसता था और आज भी पीस रहा, सरकार बदलने के नाम पर केवल चेहरे बदले हैं। हमारे को इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ा है। अब कहां पे दरवाजा खटखटाएं, कौन हमारी सुनेगा, पहली सरकारों ने नहीं सुनी लगता है यह भी नहीं सुनेगी? हमें नहीं लगता कि किसानों के कभी अच्छे दिन आएंगे?
यह पीड़ा क्षेत्र के अन्नदाताओं की है। किसान अन्न की बिजाई करने के लिए दर दर की ठोकरें खा रहे हैं। किसानों को न तो अच्छी किस्म के बीज मिल रहे हैं और न ही खाद। गेहूं का बीज तो है ही नहीं, दूसरी तरफ खाद के गोदाम भरे पड़े हैं, लेकिन किसानों को जानबूझकर परेशान किया जा रहा है। प्रशासन की लापरवाही और अनदेखी के चलते किसान लाचार हैं और खुद को ठगा सा महसूस कर हैं।
महेंद्रगढ़ में मंगलवार को गेहूं का बीज और डीएपी खाद लेने पहुंचे कई गांवों के किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। अनाज मंडी के पीछे स्थित बीज निगम का विक्रय केंद्र खाली है। यहां पर किसी भी किस्म का बीज नहीं है। इसके साथ ही लगता है को-ओपरेटिव सोसायटी का केंद्र। कार्यालय पर ताला लटका हुआ था और किसान बाहर साहब के आने का इंतजार करते रहे। करीब एक घंटे तक इंतजार करने पर भी जब कोई नहीं आया तो किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। किसानों ने विभाग व प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। जैसे ही अधिकारियों को इस बात की भनक लगी तो वे आनन-फानन में अधिकारी मौके पर पहुंचे और किसानों को समझाने की कोशिश की, लेकिन किसानों ने उनकी जमकर खिंचाई की और उन्हें खरी-खरी सुनाई। जब अधिकारी से बिक्री केंद्र बंद होने के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि वह बैंक में कैश जमा कराने गया था, ऐसी कोई भी दिक्कत नहीं है।
किसान बोले, जरूरत 20 की और मिल रहे पांच कट्टे
बलाना के ईश्वर, बाबूलाल निंबेड़ा और बाबूलाल निवासी जांट ने कहा कि गेहूं की सीजन सिर पर है। विभाग के पास न तो बीज है और न ही खाद उपलब्ध करा पा रहा है। बीज निगम की दुकान खाली है और खाद के लिए उन्हें टकराया जा रहा है। किसानों का आरोप है कि प्रति किसान केवल पांच कट्टे डीएपी ही दिया जा रहा है, जबकि किसी किसान को दस एकड़ तो किसी को बीस एकड़ के लिए खाद चाहिए। विक्रम सिंह लावन ने बताया कि किसानों को बेवजह परेशान किया जा रहा है। कभी उनसे राशन कार्ड की कापी मांगी जा रही है तो कभी अन्य तरह के कागजात। किसानों ने आरोप लगाया कि वे सुबह यहां आकर खड़े हुए थे, लेकिन कर्मचारी पहले अपने जानकारों को खाद दे रहे हैं।
खाद की हो सकती है कालाबाजारी
सरकारी दुकानों पर गेहूं का बीज और खाद नहीं मिलने के कारण बाजार में दोनों की कालाबाजारी बढ़ सकती है। सरकारी दुकान पर जहां दोनों चीजें रियायती दामों पर मिलती हैं, वहीं प्राइवेट दुकानदार किसानों से ज्यादा पैसे वसूल करते है। सरकारी दुकान पर जहां डीएपी खाद 1125 रुपये का मिल रहा है, वहीं प्राइवेट पर इसे 1150 रुपये तक बेचा जा रहा है। इसी प्रकार, सरकारी बिक्री केंद्र 730 रुपये में 40 किलोग्राम का गेहूं की बीज दिया जा रहा है, जबकि निजी दुकानों पर यहीं बीज एक हजार रुपये में मिलता है। अगर हालात यही रहे तो यह कालाबाजारी और किसानों की परेशानी और बढ़ सकती है।
ताला लगाकर बैंक में पैसे जमा कराने गया कर्मी
मंगलवार दोपहर को सोसायटी का एक कर्मचारी कैश जमा कराने के लिए बैंक में चला गया। सोसायटी में एक ही सेल्समैन होने के कारण बिक्री केंद्र को ताला लगाना पड़ा और करीब एक घंटा तक किसान बाहर ही बैठे रहे। किसानों के हंगामा करने के बाद ही सेल्समैन मौके पर पहुंचा और दोबारा से खाद देना शुरू किया। किसानों यह भी मांग की है कि सीजन होने के कारण अन्य कर्मचारियों की ड्यूटी यहां पर लगाई जाए, ताकि किसानों को परेशानी न उठानी पड़े।