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Mahendragarh-Narnaul News: बढ़ता ध्वनि प्रदूषण कई रोगों का बन रहा कारण

Sun, 03 Nov 2024 12:47 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
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नारनौल।
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आधुनिक युग में ध्वनि प्रदूषण आए दिन अपना विकराल रूप धारण करता जा रहा है। इस ध्वनि प्रदूषण से अब शहर भी अछूता नहीं बचा है। हर कोई अपने प्रचार के लिए जमकर ध्वनि प्रदूषण कर रहा है। ध्वनि प्रदूषण करने वालों पर कार्रवाई नहीं होने के कारण लोग बेखौफ जहां मर्जी वहीं इस प्रदूषण से आमजन को हानि पहुंचा रहे हैं। अत्यधिक शोर कई रोगों का कारण बन रहा है।
अभी तक शहर में डीजे, ध्वनि प्रदूषण फैलाने में सबसे ज्यादा खतरनाक साबित हो रहे हैं। इसकी तेज आवाज से न केवल लोग परेशान है अपितु श्रवण शक्ति पर भी इसका दुष्प्रभाव पड़ रहा है। अब रही सही कसर शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में सामान बेचने वालों ने पूरी कर दी है। फेरी लगाकर सब्जी, चद्दर व अन्य खाने के सामान बेचने सहित कबाड़ी भी अपने वाहन पर लाउड स्पीकर लगाकर गली मोहल्ले में एक के बाद एक घूमते रहते हैं। सड़कों पर चलने के दौरान इन सभी से न केवल दुर्घटनाओं का अपितु लोगों की सुनने की शक्ति पर भी गहरा असर पड़ता है।
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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अनुसार सप्ताह में पांच दिन 6 से 8 घंटे तक 80 डेसिबल से अधिक का शोर बहरेपन और मानसिक विकार का कारण बन सकता है। ध्वनि प्रदूषण किसी व्यक्ति के नींद चक्र को बाधित कर सकता है। ध्वनि प्रदूषण से उच्च रक्तचाप, धमनी उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, मधुमेह और चयापचय संबंधी विकारों का खतरा बढ़ जाता है। गर्भावस्था के दौरान ठंडा, शांत वातावरण रहना चाहिए। अचानक होने वाला शोर महिलाओं में गर्भपात का कारण भी बन सकता है।



डॉ. चंद्र मोहन, नोडल अधिकारी पर्यावरण क्लब राजकीय महाविद्यालय नारनौल।



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शहर में अपने स्वार्थ के लिए ध्वनि प्रदूषण को बढ़ा रहे लोगों को विभाग की तरफ जो संभव कार्रवाई होगी, वह अमल में लाई जाएगी। शहर में लाउडस्पीकर का प्रयोग कर सामान बेचने वालों ने मेरे हिसाब से किसी प्रकार की अनुमति नहीं ली हुई है, इन सबकी जांच करेंगे।
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दीपक गोयल, कार्यकारी अधिकारी नगर परिषद, नारनौल।


ध्वनि प्रदूषण का भी जच्चा-बच्चा पर नकारात्मक प्रभाव हो सकता है। अत्यधिक शोर के संपर्क में रहने से गर्भवतियों को तनाव, उच्च रक्तचाप और नींद में बाधा जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जो गर्भस्थ शिशु के विकास को प्रभावित कर सकती हैं। कई अध्ययनों में यह पाया गया है कि लंबे समय तक शोर प्रदूषण के संपर्क में रहने से समय से पहले प्रसव और जन्म के समय कम वजन का जोखिम बढ़ सकता है।
डाॅ. मेघा मित्तल, स्त्री प्रसूति रोग विशेषज्ञ नारनौल।
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