नारनौल। जिले में सड़क हादसों पर लगाम कसने के लिए जल्द ही ऑटोमैटिक फिटनेस सेंटर शुरू किया जाएगा। परिवहन विभाग ने इसकी स्थापना और संचालन को मंजूरी दे दी है। अब तक वाहनों की फिटनेस जांच सिर्फ मैन्युअल तरीके से होती थी लेकिन नए सेंटर में पूरी प्रक्रिया आधुनिक मशीनों के जरिये अपने-आप होगी।
इस सेंटर को बनाने और चलाने का जिम्मा एक निजी एजेंसी को सौंपा जाएगा। यह सेंटर निजी-सार्वजनिक भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर शुरू होगा। विभाग का मानना है कि इससे जांच में निष्पक्षता और सटीकता आएगी व गड़बड़ी की गुंजाइश खत्म होगी।
सेंटर में वाहनों की सिर्फ बाहरी हालत नहीं देखी जाएगी। डिजिटल प्रणाली से ब्रेक और सस्पेंशन की क्षमता, हेडलाइट और अलाइनमेंट की स्थिति तथा प्रदूषण स्तर समेत कई तकनीकी जांच होंगी। वाहन सभी सुरक्षा मानकों पर खरा उतरेगा, तभी उसे डिजिटल फिटनेस प्रमाण पत्र मिलेगा।
सड़क पर दौड़ रहे 245 अनफिट वाहन
आरटीए विभाग के अनुसार जिले में करीब 245 अनफिट कॉमर्शियल वाहन अभी भी सड़कों पर दौड़ रहे हैं जो किसी भी समय हादसे का कारण बन सकते हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसे वाहनों को फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा और वे सड़क पर नहीं चल सकेंगे।
हादसों में आएगी कमी
मोटर वाहन नियमों के तहत व्यावसायिक वाहनों की समय-समय पर फिटनेस जांच अनिवार्य है। विभाग को उम्मीद है कि नई प्रणाली से पुरानी और तकनीकी रूप से खराब गाड़ियां सड़क से बाहर होंगी, जिससे सफर सुरक्षित बनेगा। वर्ष 2026 में अब तक जिले में करीब 219 सड़क हादसों के मामले दर्ज हो चुके हैं।
वर्जन:
इस सेंटर को शुरू करने के लिए सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। इस पहल से न केवल वाहन जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी, बल्कि सड़कों पर चलने वाले यात्रियों का सफर भी अधिक सुरक्षित और सुगम बन सकेगा।
-मनोज कुमार, सचिव, आरटीए नारनौल।