नारनौल। बिना रूट शहर में दौड़ते करीब तीन सौ ऑटो ने व्यापारियों और यात्रियों की नाक में दम कर दिया है। नियम और कानून बनाने के बाद भी प्रभावी तरीके से लागू नहीं होने के कारण स्थिति विस्फोटक होती जा रही है। शहर की प्रमुख सड़कों और बाजारों में अक्सर ऑटो की वजह से जाम लगना आम बात हो गई है। जहां स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना लाइसेंस और रूटों के चलने वाले ऑटो पर शिकंजा कसना जरूरी है वहीं ऑटो संचालक यूनियन के नहीं होने का रोना रोते हैं। ऑटो के चलने का समय और रूट निर्धारित नहीं होने से सर्वाधिक परेशानी लोगों को होती है। ट्रैफिक पुलिस द्वारा करीब एक साल पूर्व बनाए नियम भी अब धराशायी हो गए हैं। इन ऑटो पर लगाम लगाने में पुलिस प्रशासन भी बेबस नजर आ रहा है। वर्तमान में हालात यह हैं कि ऑटो चालक शहर के सबसे व्यस्ततम महावीर चौक पर भी अपना कब्जा जमा चुके हैं।
- कहीं बैठो देने होंगे दस रुपये
सवारी चाहे एक किलोमीटर का सफर तय करे या 50 मीटर का यहां के ऑटो चालक प्रति सवारी 10 रुपये वसूल करते हैं। इस कारण लोग परेशान हैं। लोगों का कहना है कि पहले ऑटो चालक दूरी के अनुसार दो, पांच, आठ और दस रुपये लेते थे, मगर अब चाहे छोटी दूरी हो या बड़ी सबसे दस रुपये वसूल कर रहे हैं।
- पांच साल पूर्व थे 15 अब हैं 300 ऑटो
करीब पांच साल पूर्व शहर में मुश्किल से दस या 15 ही ऑटो थे। तब यहां सिटी सेवा के टैंपो की संख्या ज्यादा थी। मगर पांच सालों में सिटी सेवा के टैंपो गायब हो गए। वहीं उनका स्थान ऑटो चालकों ने ले लिया है। यह भी कहा जाता है कि ऑटो चालकों की दादागिरी के चलते ही सिटी सेवा के टैंपो बंद हो गए। अब शहर में करीब 300 के करीब ऑटो सरपट सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
- महावीर चौक पर लग जाता है जाम
शहर का मुख्य चौक महावीर चौक है। यहां से ऑटो रेलवे स्टेशन, नई मंडी और सिविल अस्पताल की तरफ जाते हैं। इस कारण महावीर चौक से रेलवे स्टेशन की तरफ जाने वाले पूरे रास्ते पर ऑटो की वजह से जाम लगा रहता है। आते-जाते समय भी ऑटो मुख्य बाजार के पास रुक जाते हैं। इससे ग्राहकों और दुकानदारों को बहुत परेशानी होती है।
- पुलिस के नियम धराशायी
करीब एक साल पूर्व 22 अगस्त 2015 को यातायात प्रभारी रही वीणा राणा ने ऑटो चालकों की बैठक लेकर उनके रूट निर्धारित किए थे। इसके लिए बाकायदा ऑटो पर रूट का नाम भी लिखा था। उनकी एक यूनियन भी बनाई, मगर अब ऐसा कुछ नहीं है। एक साल में पूरी व्यवस्था फिर से चौपट हो गई है।
- शीशे पर लिखा गया था कोड
पहला : बस स्टैंड से रेलवे स्टेशन के रूट पर चलने वाले ऑटो के शीशे पर ‘एस’ यानी स्टेशन और आटो संख्या लिखा गया था। ऑटो के शीशे पर आपको ‘एस’ अंकित दिखे तो लोगों को यह समझने में आसानी होगी कि वह ऑटो बस स्टैंड से रेलवे स्टेशन के बीच चलेगा।
दूसरा : जिस ऑटो के शीशे पर अंग्रेजी शब्द ‘सी’ लिखा हो। उसका मतलब होगा सिटी यानी शहर के अंदरूनी हिस्से में चलने वाला ऑटो। यह ऑटो बस स्टैंड से महावीर चौक, पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस, पुलिस लाइन, अग्रसेन चौक, लोहा मंडी, सामान्य अस्पताल, किला रोड, महता चौक, नेताजी सुभाषचंद्र बोस स्टेडियम, निजामपुर रोड-नांगल चौधरी रोड टी-प्वाइंट (सैनी धर्म कांटा), निजामपुर रोड, कोरियावास मोड़, कुलताजपुर मोड़, हैफेड, बाल भवन होकर हीरो होंडा चौक से महावीर चौक के बीच चलेगा।
तीसरा: जिसके शीशे पर ‘एन’ लिखा हो उसका मतलब होगा वह ऑटो बस स्टैंड से नांगतिहाड़ी के बीच चलेगा। यह ऑटो बस स्टैंड से महावीर चौक होकर महेंद्रगढ़ रोड स्थित ऑफिसर कॉलोनी के सामने कुछ पल रुकने के बाद पंचायत भवन, बिजली घर, हुडा सेक्टर, शास्त्री नगर, नूनी-शेखपुरा मोड़, सरस्वती स्कूल, जिला जेल, हाउसिंग बोर्ड, रामनगर, गणेश कालोनी, नसीबपुर, निवाजनगर मोड़ होकर सीधे महेंद्रगढ़ रोड से नांगतिहाड़ी पहुंचेगा।
यह कहना है लोगों का
शहर में ऑटो संचालकों की मनमर्जी से काफी परेशानी होती है। ये लोग जहां चाहे वहीं अपना ऑटो खड़ा कर देते हैं। इससे कई बार दुकानदारी भी प्रभावित होती है।
- महेश कुमार
ऑटो चालकों ने अपना किराया निर्धारित किया हुआ है। ये लोग तेज गति से ऑटो चलाते हैं। शहर में ऑटो की संख्या अचानक बढ़ने से ट्रैफिक जाम की समस्या हो गई है। - साधूराम
शहर में सैकड़ों ऑटो चल रहे हैं, मगर उनकी कोई यूनियन नहीं है। उनकी मांग है कि शहर में एक ऑटो यूनियन का भी गठन किया जाए। - हनुमान
वे अपने ऑटो को सही तरीके से चलाते हैं। कहीं कोई ट्रैफिक जाम जैसी समस्या नहीं होने देते। शहर में उनकी कोई यूनियन नहीं है। अपनी बात रखने का प्लेटफार्म नहीं मिल रहा। ऑटो चालकों की यूनियन का गठन होना चाहिए। - अश्वनी कुमार, चालक
कोट
समय-समय पर ऑटो संचालकों पर कार्रवाई की जाती है। महावीर चौक के पास अब ऑटो को खड़ा नहीं होने दिया जाता। यहां पर यातायात बाधित होने जैसी कोई समस्या नहीं आती है। इसके लिए एक पुलिस कर्मचारी की स्पेशल ड्यूटी लगाई गई है। इनके चालान भी किए जा रहे हैं। इनके पास लाइसेंस हैं या नहीं इसकी जांच करके बताएंगे। - सावंतराम, ट्रैफिक एसएचओ, नारनौल