नारनौल। वर्ष 2025 में जिले के करीब 220 लोगों ने तंबाकू की लत छोड़ी थी। वहीं, वर्ष 2026 में अब तक लगभग 50 लोग तंबाकू छोड़ने के लिए क्लीनिक में उपचार ले रहे हैं। विभाग का दावा है कि सही परामर्श और दवाओं की मदद से तंबाकू की लत से छुटकारा पाया जा सकता है।
तंबाकू सेवन करने वालों में सबसे अधिक संख्या गुटखा खाने वालों की है। करीब 60 प्रतिशत लोग गुटखे का सेवन करते हैं। नागरिक अस्पताल में हर महीने 8 से 10 मरीज ऐसे पहुंचते हैं जिनके मुंह में छाले हो जाते हैं या मुंह खुलना बंद हो जाता है। डॉक्टरों के अनुसार यह ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस नामक बीमारी है जो मुंह के कैंसर की शुरुआती अवस्था मानी जाती है।
इसके अलावा बीड़ी, सिगरेट और हुक्का पीने वालों में भी स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। हर माह 10 से 15 मरीज सांस संबंधी बीमारियों के इलाज के लिए अस्पताल पहुंचते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि धूम्रपान से फेफड़ों का कैंसर, अस्थमा, टीबी, हृदय रोग, स्ट्रोक और हाई ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
जिले में तंबाकू सेवन के खिलाफ हर माह चार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को तंबाकू के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी दे रहा है। नागरिक अस्पताल में तंबाकू मुक्त क्लीनिक भी संचालित किया जा रहा है जहां तंबाकू छोड़ने के इच्छुक लोगों को मुफ्त परामर्श और उपचार उपलब्ध कराया जाता है।
वर्जन :
तंबाकू के सेवन से मुंह के कैंसर का खतरा सबसे अधिक रहता है। लोगों को जागरूक करने के लिए विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रम किए जाते हैं। दवाओं व परामर्श से तंबाकू छोड़ना संभव है। जरूरत सिर्फ मजबूत इच्छाशक्ति की है।
-डॉ. अनिल यादव ने बताया, मनोरोग चिकित्सक, नागरिक अस्पताल, नारनौल