मानव अधिकारों के संरक्षण के लिए आयोग लगातार लोगों को अधिकारों के प्रति सजग करने का काम कर रहा है। शासन-प्रशासन को मानव अधिकारों के प्रति और अधिक संवेदनशील बनाने की दिशा में भी आयोग लगातार काम कर रहा है। ये बातें हरियाणा मानव अधिकार आयोग के चेयरमैन विजेंद्र जैन ने कही। वे रविवार को स्थानीय सभागार में मानव अधिकार पर आयोजित एक दिवसीय सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। जैन ने कहा कि मूलभूत मानव अधिकारों का जहां सही ढंग से संरक्षण होता है वही सुशासन होता है। लोगों के अधिकारों को संरक्षित रखने के लिए आयोग कई बार अपने आप भी संज्ञान लेकर राज्य सरकार को निर्देश देता रहता है।
जैन ने कन्या भ्रूण हत्या का जिक्र करते हुए कहा कि हमारे लिए शर्म की बात है कि यह जिला लिंगानुपात में सबसे नीचे पायदान पर है। हम लड़कियों की पैदा होने से पहले ही आवाज को बंद कर देते हैं। यह सबसे बड़ा मानव अधिकार का हनन है। इसमें कानून दंड दे सकता है, लेकिन हृदय परिवर्तन नहीं कर सकता। समाज को खुद को इन प्रथाओं को खत्म करना होगा। हरियाणा मानव अधिकार आयोग के सदस्य जेएस अहलावत ने कहा कि आयोग का मकसद जन-जन तक मानव अधिकारों की अलख जगाना है। हम पश्चिमी सभ्यता की ओर मुड़कर अपना ही नाश कर रहे हैं। हमें अपनी पुरानी संस्कृति और विचारों को अपनाना होगा जहां महिला-पुरुष का बराबर का दर्जा होता था। इस अवसर पर विभिन्न स्वास्थ्य कर्मियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया गया।
इस मौके पर आयोग के सदस्य जेएस अहलावत, डीजीपी हरियाणा मानव अधिकार आयोग एके ढूल, जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरुण कुमार सिंगल, आईजी ममता सिंह, उपायुक्त संजीव वर्मा, अतिरिक्त श्रम आयुक्त अनुपम मलिक, पुलिस अधीक्षक हामिद अख्तर, एडीसी आरएस वर्मा, एसडीएम सुरेश कुमार कासवां व नगराधीश कैप्टन मनोज खत्री आदि थे।
रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ जिले के लिए दिल्ली में कोर्ट बनाया
डीजीपी इनवेस्टीगेशन हरियाणा मानव अधिकार आयोग एके ढूल ने कहा कि आज भी समाज में बाल विवाह जैसी प्रथा है जो सीधे-सीधे मानव अधिकारों का हनन है। आयोग ने लोगों की सुविधा के लिए रेवाड़ी व नारनौल जिले के नागरिकों के लिए दिल्ली में भी एक कोर्ट बनाया है ताकि आपको चंडीगढ़ न जाना पड़े।
हम एक पहिए से गाड़ी चलाने का प्रयास कर रहे हैं
आईजी ममता सिंह ने कन्या भ्रूण हत्या पर बोलते हुए कहा कि हमने कितनी भी आर्थिक तरक्की की है लेकिन सामाजिक रूप से हमारी सोच आज भी नीचे की ओर जा रही है। साइंस व तकनीक का हम गलत उपयोग करके कन्याओं को गर्भ में ही मार रहे हैं। लड़कियों को पराया धन मानते हैं। जब तक यह सोच नहीं बदलेगी समाज में व्यवस्था परिवर्तन नहीं हो सकती।
कन्याओं के हत्यारों की सूचना प्रशासन को दें
उपायुक्त संजीव वर्मा ने कहा कि वैदिक काल में संतानों के नाम के आगे मां का नाम आता था लेकिन आज हमारा इतना नैतिक पतन हो चुका है कि अपने घर में बेटी को जन्म ही नहीं लेने देते। अगर आप आज से ही यह प्रण लें कि किसी भी हालत में बेटी को नहीं मरने देंगे तो मात्र एक साल में ही इस हालत में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है। आप जिला प्रशासन को ऐसे कृत्य करने वालों की सूचना दें। आपका नाम गुप्त रखा जाएगा और ऐसे राक्षसों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
बालश्रम में गरीबी तो बहाना है
बालश्रम पर बोलते हुए अतिरिक्त श्रम आयुक्त अनुपम मलिक ने कहा कि बाल श्रम सबसे बड़ा अभिशाप है। बच्चों से काम करवाने का गरीबी तो बहाना है। विकास करने का हर बच्चे का अधिकार है। बंधुआ मजदूरी करवाने वालों के खिलाफ विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है। जबरन किसी से काम करवाना ही बंधुआ मजदूर की श्रेणी में आता है। अगर कोई ऐसी सूचना देता है तो इन कानूनों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे।
जिला प्रशासन की पीठ थपथपाई
मानव अधिकार आयोग के चेयरमैन वीरेंद्र जैन ने कहा कि यह जिला नैसर्गिक सौंदर्य वाला जिला है। इसमें पहाड़ों को बचाना बहुत जरूरी है। उन्होंने उपायुक्त संजीव वर्मा की तारीफ करते हुए कहा कि जिला प्रशासन ने खनन माफिया के साथ सख्त रवैया अपनाया है। यह पर्यावरण संरक्षण के लिए बड़ा कदम है। अगर प्रकृति के साथ हो रही इस छेड़छाड़ को नहीं रोक पा रहे हैं तो यह बहुत बड़ा मानव अधिकारों का हनन है।