जिले में डेंगू बुखार ने दस्तक दे दिया है। इस साल का पहला डेंगू का मरीज तीन साल का बच्चा खरौली गांव में मिला है। हालांकि अब बच्चे के स्वास्थ्य में सुधार है। डेंगू का मरीज के सामने आने पर स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट हो गया है। डिप्टी सीएमओ ने गांव का दौराकर मामले की जानकारी ली। वहीं, पिछले साल जिले में डेंगू के चार मरीज मिले थेे।
बता दें कि बारिश के मौसम में घर व आस-पास पानी जमा नहीं होने देने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा बार-बार लोगों को सतर्क किया जा रहा है। इसके बावजूद लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते। ऐसे में डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियां फैलने की आशंका बनी रहती हैं। इस वर्ष जिले में डेंगू का पहला मामला गांव खरौली में सामने आया है। गांव में तीन साल के बच्चे को डेंगू बुखार होने की पुष्टि हुई है।
जानकारी के अनुसार करीब एक सप्ताह पहले खरौली गांव में तीन साल के बच्चे को बुखार होने की शिकायत पर जिला नागरिक अस्पताल में उपचार के लिए लाया गया था। डॉक्टरों ने बच्चे के ब्लड की जांच कराई। जिसमें डेंगू बुखार की पुष्टि हुई। इसके बाद डॉक्टरों ने बच्चे को हायर सेंटर रेफर कर दिया था। परिजन बच्चे को लेकर जयपुर ले चले गए थे। डेंगू का मरीज सामने आने पर डिप्टी सीएमओ व जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. डीके सैनी टीम के साथ गांव खरौली में पहुंचे और बच्चे के घर की जांच की। डॉ. सैनी ने पीड़ित परिवार के साथ अन्य लोगों को घर व आसपास पानी जमा न होने हिदायत दी। इसके अलावा उन्होंने लोगों को डेंगू व मलेरिया बुखार के बारे में जानकारी दी।
डॉ. सैनी ने बताया कि गांवों में सर्वे कराया जा रहा है। जिसे भी बुखार है, उसकी स्लाइड बनाकर जांच की जा रही है। इसके अलावा घरों में पानी की टंकियों को की जांच की जा रही है, ताकि डेंगू मच्छर के लारवा नष्ट हो सकें। इसके लिए जिले में टीमें लगी हुई है। डॉ. डीके सैनी ने बताया कि अंडे से लारवा बनने व मच्छर बनने में सात दिन लगते हैं। इसलिए हर सप्ताह कूलर, पानी की टंकी व घर के अन्य बर्तनों के पानी को निकालकर सुखा लेना चाहिए। सात दिन का समय नहीं मिलने पर मच्छर पनप नहीं सकेगा। यदि अपने घर और आसपास पानी जमा नहीं होने दें तो मच्छर पैदा ही नहीं हो सकेगा।
रखे ध्यान
डॉक्टरों के अनुसार डेंगू बुखार से बचने के लिए कोई दवा नहीं है, इससे बचाव ही एकमात्र इलाज है। घरों में सीमेंट से बनी बिना ढक्कन वाली पानी की टंकियों में सबसे अधिक मच्छर पैदा होने की आशंका रहती है। इससे बचने के लिए पानी की टंकियों और मटकों को बिना ढक्कन के नहीं रखें। कूलर का पानी हर सप्ताह निकालकर सुखाएं। गमले, बेकार पड़े टायर, प्लास्टिक की बोतल, गिलास आदि में पानी जमा न रहने दें। इनमें ही मच्छर पनपने के अधिक संभावना होती हैं।
खरौली गांव में तीन साल के बच्चे में डेंगू बुखार के लक्षण मिले हैं। उसका जयपुर के एक निजी अस्पताल में उपचार चल रहा था। अब बच्चा बेहतर है। जयपुर के अस्पताल से बच्चे की उपचार रिपोर्ट मांगी गई है। विभाग की ओर से गांवों व अस्पतालों में बुखार पीड़ितों की ब्लड की स्लाइड बनाने के साथ मच्छरों के लारवा की जांच चल रही है।
डॉ. डीके सैनी, डिप्टी सीएमओ, नारनौल
मलेरिया व डेंगू के केस-
बुखार- साल 2014- साल 2015- साल-2016- साल 2017- साल-2018- साल-2019
मलेरिया 36 32 24 25 22 0
डेंगू 02 05 03 03 04 01
मशीन खराब, खून जांच की रिपोर्ट के लिए परेशान हुए मरीज
जिले के लोग मच्छर जनित बीमारियों के अलावा वायरल बुखार से भी जूझ रहे हैं। इस मौसम में अस्पताल में बुखार के काफी मरीज आ रहे हैं। ऐसे में हर प्रकार के बुखार के मरीजों का ब्लड जांच हो रहा है। वीरवार को ब्लड जांच की मशीन में खराबी होने से मरीजों को परेशानी उठानी पड़ी। सुबह खून का सैंपल दे चुके मरीजों को दोपहर दो बजे तक रिपोर्ट नहीं मिली। इस पर मरीज एमएस डॉ. आशा शर्मा से मिले। मरीजों का कहना है कि सुबह से दोपहर तक अस्पताल में बैठे हुए हैं। अब रिपोर्ट लेने के लिए दोबारा उन्हें अस्पताल में आना होगा है। नागरिक अस्पताल के डिप्टी एमएस राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि मशीन के प्रिंट में खराबी की शिकायत थी। दूसरी ओर कर्मचारियों हाथ से रिपोर्ट बनाकर दोपहर तीन बजे तक मरीजों को दिया। बता दें कि एक सप्ताह से मौसम में बदलाव आया है। बारिश के बाद तेज धूप व उमस के कारण लोग तेजी से वायरल बुखार की चपेट में आना शुरू हो गए हैं। नमी व तापमान के कारण वायरल का प्रकोप अधिक रहता है। सरकारी अस्पतालों के साथ निजी अस्पतालों में बुखार के काफी मरीज आ रहे हैं। वायरल फीवर में भी प्लेटलेट्स कम होने की शिकायत रहती है।