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सरकारी अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी में एंटी रेबीज के टीके खत्म

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अगर आप कुत्ता, बंदर, बिल्ली अन्य जानवर द्वारा काटने पर सरकारी अस्पताल में एंटी रेबीज का टीका लगवाने जा रहे हैं तो अपने साथ एंटी रेबीज का टीका बाहर से खरीदकर लेकर जाएं। क्योंकि जिले के नागरिक और उप नागरिक अस्पताल में एंटी रेबीज के टीके पिछले कई दिनों से खत्म हैं। ये टीके न तो ओपीडी में आने वाले घायलों के लिए उपलब्ध है और न ही आपातकालीन विभाग में। इसी वजह से अस्पताल में पहुंचने वाले जरूरतमंद मरीजों को मायूस वापस लौटना पड़ रहा है।
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टीके खत्म होने की वजह से कई मरीजों का कोर्स बीच में ही छूट चुका है। जिले में प्रतिदिन 20 से अधिक मरीज आ रहे हैं। परंतु अस्पताल में आ रहे मरीजों को बाहर मेडिकल स्टोर से टीका लेकर आना पड़ रहा है। जहां इस टीके के 350 रुपये लिए जा रहे हैं। जबकि सरकारी अस्पताल में यह टीका बीपीएल को फ्री और सामान्य श्रेणी के मरीज को 100 रुपये की रसीद कटने पर लगाया जाता है। खासतौर पर गरीब लोगों को ज्यादा परेशानी हो रही है। वो इतने रुपये का टीका लाने में सक्षम नहीं होते। इसलिए ऐसे में कुछ मरीज अपनी जान जोखिम में डालकर इंजेक्शन आने का इंतजार कर रहे हैं और कुछ निजी केमिस्ट शॉप से टीके खरीदकर लगवा रहे। स्टाफ के मुताबिक इंजेक्शन की डिमांड भेजी जा चुकी है, जबकि वेयर हाउस भिवानी में भी इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है।
इन अस्पतालों में नहीं है दो महीने से टीके
राजकीय सिविल अस्पताल कनीना में पिछले तीन महीने से एंटी रेबीज के टीके नहीं हैं। अस्पताल में प्रतिमाह लगभग 30 मरीज आते हैं। राजकीय सिविल अस्पताल नांगल सिरोही में दो महीने से, राजकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पाली में एक महीने से एंटी रेबीज के टीके नहीं हैं। इन अस्पतालों में प्रतिमाह में 30 से 35 मरीज आ रहे हैं। इसके अलावा महेंद्रगढ़ में प्रति माह 100 से अधिक तथा नारनौल में 150 से अधिक मरीज आते हैैं।
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ऐसे लगते हैं रेबीज के टीके
कुत्ते के काटने पर कुल पांच टीके लगाए जाते हैं। पहला टीका कुत्ते वाले दिन लगाया जाता है। दूसरा टीका तीन दिन बाद, तीसरा टीका 7, चौथा टीका 14 और पांचवां टीका 28 दिन बाद लगता है। इस समय यह टीका लगवाना गरीब लोगों के लिए मुश्किल बन गया है। क्योंकि बाजार से रेबीज का एक टीका 350 रुपये का आता है, पूरे कोर्स पर 1750 रुपये का खर्चा होता है।
कैसे प्रभावित करता है रेबीज
रेबीज एक तरह का वायरल संक्रमण है जो आमतौर पर संक्रमित जानवरों के काटने से फैलता है। इसका वायरस खतरनाक होता है। अगर सही समय पर इसका इलाज न किया जाए तो खतरनाक साबित हो सकता है। रेबीज व्यक्ति के शरीर को दो तरह से प्रभावित करता है। जब रेबीज वायरस व्यक्ति के नर्वस सिस्टम में पहुंच जाते हैं तो इसके बाद मस्तिष्क तक पहुंच जाते हैं। रेबीज वायरस नर्वस सिस्टम में पहुंच जाता है तो दिमाग में सूजन पैदा हो जाता है। इससे व्यक्ति कोमा में जा सकता है या उसकी मौत हो सकती है। कभी-कभी उसे पानी से भी डर लगता है। इसके अलावा कुछ लोगों को लकवा भी हो सकता है।
वहीं, ओमप्रकाश सूरजनवास ने बताया कि कुछ दिन पहले उसके 6 वर्षीय पोते को कुत्ते ने काट लिया था। उसको दो टीके अस्पताल से लगवा दिए थे। परंतु अब यहां टीके खत्म हो चुके हैं। इसलिए बाहर से 350 रुपये का टीका खरीदना पड़ा।
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अस्पताल में एंटी रेबीज के टीके खत्म हैं। यह स्थिति महेंद्रगढ़ जिले में नहीं बल्कि पूरे हरियाणा में है। उच्च अधिकारियों को इस बारे अवगत करवाया हुआ है।
- संतलाल वर्मा, सीएमओ, नागरिक अस्पताल नारनौल।
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