महेंद्रगढ़। होलाष्टक मंगलवार से शुरू होकर दो मार्च तक रहेगा जिसके दौरान मांगलिक कार्यों पर रोक रहेगी। फाल्गुन अष्टमी से शुरू होकर होलिका दहन तक के इन 8 दिनों में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, और वाहन खरीद जैसे शुभ काम वर्जित माने जाते हैं। इस अवधि में ग्रह उग्र होते हैं इसलिए यह साधना और दान के लिए श्रेष्ठ है न कि नए कार्यों के लिए।
ज्योतिषाचार्य पंडित राहुल भारद्वाज गढ़ी ने बताया कि होलाष्टक की आठ रात्रियों का काफी अधिक महत्व है। इन आठ रात्रियों में की गई साधनाएं जल्दी सफल होती हैं। इन रातों में तंत्र-मंत्र से जुड़े लोग विशेष साधनाएं करते हैं।
ज्योतिष की मान्यता है कि होलाष्टक के आठ दिनों की अलग-अलग तिथियों पर अलग-अलग ग्रह उग्र स्थिति में रहते हैं। अष्टमी को चंद्र, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल, पूर्णिमा को राहु उग्र स्थिति में रहता है। नौ ग्रहों की उग्र स्थिति की वजह से इन दिनों में मांगलिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त नहीं रहते हैं।
उन्होंने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक का संबंध भक्त प्रह्लाद और हिरण्यकश्यप की कथा से जोड़ा जाता है। हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति करने से रोकने के लिए फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से लेकर होली तक आठ दिन अत्यधिक यातनाएं दी। इन आठ दिनों में प्रकृति का वातावरण उग्र हो गया था। इससे ये समय शुभ कार्यों के लिए अशुभ माना जाने लगा।