मंडी अटेली। राजस्थान की सीमा पर स्थित गांव कुंजपुरा का इतिहास लगभग 400 साल पुराना है। यहां पर आधी से ज्यादा आबादी अहीर समुदाय से संबंधित है। गांव के अधिकतर लोग कृषि और पशुपालन से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा यहां के निवासी भारतीय सेना, पुलिस, शिक्षा विभाग और अन्य विभागों में अपनी सेवा दे रहे हैं।
गांव के बुजुर्ग श्रीराम, रामस्वरूप, रामौतार यादव व अशोक यादव ने बताया कि सबसे पहले ठुकरान गौत्र के पांच भाई यहां आए थे। उन्होंने कुंजपुरा, श्यामपुरा, अकलीमपुर, नरेड़ा और नाय सराना गांव बसाया था। आज कुंजपुरा गांव में लगभग 600 घर हैं जिनमें 4500 के करीब लोग निवास करते हैं।
स्वतंत्रता सेनानी दिवंगत डूंगाराम ने आजाद हिंद फौज में रहकर स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया था। गांव के पूर्व सरपंच रति राम यादव, वैद्य राम प्रसाद, भगवान सिंह, शेर सिंह, दयानंद, पंडित राधेश्याम, रणधीर सिंह, कोकली देवी, बलवंत सिंह और दलीप सिंह ने गांव के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
वर्तमान में गांव कुंजपुरा युवा सरपंच नरेंद्र सिंह के नेतृत्व में विकास के पथ पर अग्रसर है। कर्नल रामकुमार, ईटीओ राजबीर सिंह और लाला राम यादव सेवानिवृत अधिकारी हैं जबकि विजय सिंह यादव जिला राजस्व अधिकारी के पद पर सुशोभित हैं।
इसके अतिरिक्त ब्लॉक समिति के निवर्तमान चेयरमैन अशोक यादव और सीआरपीएफ में सेवारत असिस्टेंट कमांडेंट व जूडो राष्ट्रीय चैंपियन वीरेंद्र यादव ने भी पुलिस गेम्स में गोल्ड मैडल हासिल कर गांव कुंजपुरा के गौरव को बढ़ाया है।
गांव में बाबा भैया और शिव मंदिर हैं जिनमें ग्रामीणों की आस्था बनी हुई है। धुलंडी के एक दिन बाद गांव में मेले और दंगल का आयोजन होता है। साथ ही मेले में कबड्डी और वॉलीबॉल खेलों का आयोजन होता हैं।
सरपंच नरेंद्र सिंह ने बताया कि गांव में मैट्रिक तक का स्कूल, वेटनरी अस्पताल, ई-लाइब्रेरी, स्ट्रीट लाइट और सीसीटीवी की सुविधाएं उपलब्ध हैं। वहीं खेल स्टेडियम, पानी के रिचार्ज बोर, मिनी बैंक, डाकघर और पार्क आदि सुविधाओं की अब भी दरकार है।
गांव के समुचित विकास के लिए ग्राम पंचायत द्वारा योजनाएं बनाई जा रही हैं जिसका उद्देश्य गांव को और अधिक विकसित बनाना है।