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गया वह आता है जिसे अपने पितरों को मुक्त करना होता है : स्वामी कमलदास

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फोटो संख्या:81- मोहल्ला नीमड़ी  नीचे ​स्थित ​शिव मंदिर में कथा  सुनाते ---संवाद - फोटो : File Photo
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महेंद्रगढ़। पितृपक्ष के उपलक्ष्य में श्री लाइना बाबा सरकार की अनुकंपा से नीमड़ी नीचे साईं मंदिर में चल रही सात दिवसीय संगीतमय श्री शिवमहापुराण कथा के तीसरे दिन स्वामी कमलदास बापू ने सृष्टि की उत्पत्ति और भगवान शिव के विभिन्न व्रतों की कथा सुनाई। उन्होंने गया में श्राद्ध करने के धार्मिक महत्व और इसके पांच प्रमुख कारणों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
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उन्होंने बताया कि गयासुर नामक असुर ने कठोर तपस्या कर ब्रह्माजी से ऐसा वरदान प्राप्त किया था, जिससे उसके दर्शन मात्र से लोग पापमुक्त हो जाते थे। देवताओं ने यज्ञ के लिए गयासुर से पवित्र स्थान मांगा और उसने अपना शरीर अर्पित कर दिया। उसके लेटने पर शरीर पांच कोस तक फैल गया, जिसे आगे चलकर गया क्षेत्र के रूप में जाना गया।

स्वामी कमलदास बापू ने बताया कि गयासुर ने बाद में वरदान मांगा कि यह स्थान लोगों और पितरों को तारने वाला बना रहे। तभी से गया में श्राद्ध और पिंडदान की परंपरा चली आ रही है। उन्होंने कहा कि मृतक के 12-13 माह के मासिक श्राद्ध पूरे होने के बाद पितृपक्ष में तिथि के अनुसार उसे पितरों में मिलाया जाता है। गया में श्राद्ध के बाद अंतिम श्राद्ध बदरीनाथ धाम के ब्रह्मकपाली में करने की परंपरा बताई गई है।
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उन्होंने कहा कि गया में भगवान विष्णु गदाधर रूप में पितृदेवता के रूप में विराजमान हैं और पिंडदान के लिए गया को सर्वोत्तम स्थान माना गया है। इस अवसर पर मंदिर प्रधान देवेंद्र अरोड़ा, सुनील लखेरा, पुजारी योगेश शर्मा, अरुण अग्रवाल, सुमन, विक्की सोनी, सिया, सत्यवती देवी सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।
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