महेंद्रगढ़। श्रावण माह की हरियाली अमावस्या के अवसर पर यादव धर्मशाला महेंद्रगढ़ में हवन एवं सत्संग का आयोजन किया गया। यज्ञ ब्रह्मा के रूप में सेवानिवृत्त अध्यापक रघुनाथ सिंह आर्य उपस्थित रहे।
यज्ञ पुरोहित यादव सभा के उपाध्यक्ष पंडित भूपेंद्र सिंह आर्य रहे। वरिष्ठ अधिवक्ता एवं निशुल्क कानूनी सलाहकार धर्मवीर सिंह यादव ने बताया की श्रावण मास की अमावस्या को हरियाली अमावस्या के नाम से जाना जाता है। बारिश का मौसम होने के कारण चारों तरफ हरियाली होती है।
इस दिन लोग अपने घरों में स्वाध्याय, ईश्वर की उपासना, संध्या, यज्ञ रचाकर, पूजा-पाठ और अनुष्ठान करते हैं, मंदिरों में, गोशालाओं में जाते हैं तथा दान-पुण्य करते हैं। सुख सौभाग्य प्राप्ति का दिन माना गया है। इस दिन पेड़-पौधों को लगाना और उनकी देखभाल करना भी शुभ माना जाता है। अधिवक्ता अभय राम यादव ने बताया कि श्रद्धा पूर्वक धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों को करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
मास्टर रघुनाथ सिंह आर्य ने महर्षि दयानंद सरस्वती के जीवन चरित्र, सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए ईश्वर के गुणवाचक नामों की व्याख्या करते हुए कहा कि वेदों के अनुसार, ईश्वर एक है और निराकार है। वेद सत्य विद्याओं का पुस्तक है और वेदों का पढ़ना-पढ़ाना और सुनना-सुनाना सब श्रेष्ठ व्यक्तियों का परम धर्म है। आर्य समाज का मुख्य उद्देश्य संसार का उपकार करना है, अर्थात शारीरिक, आत्मिक और सामाजिक उन्नति करना। मनुष्य को सत्य के ग्रहण करने और असत्य को छोड़ने में सर्वदा उद्यत रहना चाहिए और सब काम धर्मानुसार, अर्थात सत्य और असत्य को विचार करके करने चाहिए। शांति पाठ से यज्ञ संपन्न हुआ। इस अवसर पर निर्मला यादव, कोमल यादव, रामकला, लाली, देवी, सेवानिवृत प्रो. बस्तीराम खैरवाल, कप्तान राजेंद्र सिंह खेड़ा, मास्टर लक्ष्मी नारायण यादव, राजेंद्र सिंह सहित समस्त यादव सभा कार्यकारिणी उपस्थित रहे।