महेंद्रगढ़। हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है। हर साल में चार बार नवरात्र का पर्व मनाया जाता है। आमतौर पर चैत्र और आश्विन मास में आने वाले नवरात्र को तो सब जानते है, लेकिन इनके अतिरिक्त भी विशेष कामनाओं की सिद्धि के लिए आषाढ़ और माघ माह के नवरात्र होते है जिन्हें गुप्त नवरात्र कहते हैं।
ज्योतिषाचार्य पंडित राहुल भारद्वाज गढ़ी ने बताया कि इस बार आषाढ़ माह के गुप्त नवरात्रि का 6 जुलाई शनिवार से प्रारंभ हो रहा है। इसके 15 जुलाई सोमवार भड़लिया नवमी को इनका समापन होगा। इस बार गुप्त नवरात्र 9 नहीं बल्कि 10 दिनों की होंगे।
इन नवरात्रों के दौरान मां दुर्गा के 10 महाविद्याओं मां काली, तारा देवी, षोडशी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा विधिवत रूप से पूजा व आराधना की जाती है। गुप्त नवरात्रि में पूजा को गुप्त रखा जाता है यानी किसी बताया नहीं जाता है। साधना जितनी गुप्त होती है उसका फल उतना ही फलदाई होता है।
ये रहेगा नवरात्र में कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
नवरात्र के पहले दिन शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखते हुए कलश स्थापना की जाती है। घटस्थापना का शुभ समय सुबह 7:19 बजे से सुबह 9:03 बजे तक रहेगा। अगर इस समय नहीं कर पाए तो इसके बाद अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:03 बजे से दोपहर 12:58 बजे तक रहेगा। उन्होंने बताया कि शुभ मुहूर्त में किया गया कार्य पूजन अनुष्ठान हमेशा ही सफल होता है।
गुप्त नवरात्र में नए कार्य का शुभारंभ, भूमि-भवन व वाहन की खरीदारी, गृहप्रवेश, भूमिपूजन, मुंडन, बहुमूल्य वस्तुओं की खरीदी के लिए ग्रह- नक्षत्रों की शुभ स्थिति होने से कई मंगल व शुभकारी संयोग बन रहे हैं। इसमें 6 जुलाई को त्रिपुष्कर योग, 7 जुलाई को पुष्य नक्षत्र व सर्वार्थ सिद्धि योग, 8 जुलाई को पुष्य नक्षत्र, सर्वार्थ सिद्धि योग व जयद् योग, 9 जुलाई को सर्वार्थ सिद्धि योग व जयद् योग, 10 जुलाई को रवियोग, 11 जुलाई को रवियोग व सिद्धयोग, 12 जुलाई को रवियोग व सिद्धयोग, 13 जुलाई को जयद् योग, 14 जुलाई को शिव योग, सिद्ध योग, रवियोग, जयद् योग, 15 जुलाई को साध्य योग, रवियोग, जयद् योग का संयोग बन रहा है।