फोटो नंबर-01गांव शहरपुर में लगाया गया अमरूद का बाग।संवाद
नारनौल। जिले के किसानों ने अब परंपरागत खेती को छोड़कर फलों की खेती में हाथ आजमाना शुरू कर दिया है। साथ ही इससे उनको हर साल अच्छा मुनाफा भी हो रहा है। क्षेत्र में प्रगतिशील किसान गांव शहरपुर के रामफल और भवानी और मंडलाणा के धीरेंद्र ने अमरूद, नींबू, किन्नू और बेर के बाग लगाकर नई पहल तो की ही है। साथ ही इससे उन्हें परंपरागत खेती की तुलना में अधिक लाभ भी मिल रहा है।
कोरोना काल के दौरान जहां लोगों के पास काम धंधा नहीं रहा था, उस वक्त नारनौल के नजदीकी गांव शहरपुर के रहने वाले एक सेवानिवृत्त फौजी इंद्रजीत ने दो एकड़ खेत में अमरूद का बाग लगाने की सोची। हालांकि इस समय अपने नजदीकी व दोस्तों से उन्होंने सलाह भी ली, लेकिन सब ने उनको यह काम करने से मना किया। इसके बावजूद दृढ़ निश्चय और हिम्मत के साथ उन्होंने साल 2020 में अमरूद का बाग लगाया। आज वह इसी बाग से सालाना 8 से 10 लाख रुपयों की आमदनी कर रहे हैं। साथ ही कई लोगों को रोजगार भी दिया है।
इंद्रजीत आर्मी में बटालियन में राशन सप्लाई का काम करते थे। ऐसे में उनको बागवानी से जुड़े काम की जानकारी हो गई थी। फरवरी 2020 में सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने अपने खेतों में अमरूद का बाग लगाने की ठानी और सबके मना करने के बावजूद भी उन्होंने अपने दो एकड़ खेत में अमरूद की अलग अलग किस्म के 1350 पौधे लगाए।
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करीब 15 लाख की लागत
इंद्रजीत ने बताया कि जमीन की जांच कराने के बाद अमरूद के पौधे लगाने, पक्षियों से फल के बचाव के लिए जाल लगवाने, सिंचाई के लिए ड्रिप सिस्टम व खेत के चारों ओर फेंसिंग आदि करवाने में करीब 15 लाख की लागत लगी। हालांकि बागवानी विभाग की ओर से सब्सिडी भी मिली थी, जो किश्तों में उनके बैंक खाते में आई है।
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ताइवान पिंक की ज्यादा मांग
खेत में इंद्रजीत ने अमरूद की हिसार सफेदा, हिसार सुर्खा, ललित और ताइवान पिंक के पौधे लगाए थे। करीब डेढ़ साल बाद इन सभी पौधों पर फल लगने शुरू हो गए हैं। इनको नारनौल मंडी में बेचकर वह अच्छा खासा मुनाफा ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि इन फलों की सभी किस्मों में सबसे ज्यादा मांग ताइवान पिंक अमरूद की है। ताइवान पिंक का पौधा सर्दी व गर्मी दोनों ही मौसम में फल देता है। खाने में स्वादिष्ट भी है।