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ग्वार की फसल भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाती है : डॉ. जयलाल

Thu, 14 Aug 2025 12:39 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
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फोटो संख्या:-66 गांव खेड़की में ग्वार फसल की जानकारी देते हुए कृ​​षि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानि - फोटो : mathura
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महेंद्रगढ़। कृषि विज्ञान केंद्र और हिंदुस्तान गम एंड केमिकल्स लिमिटेड भिवानी की ओर से गांव खेडकी में किसानों के लिए ग्वार फसल की अच्छी पैदावार विषय पर प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया।
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केंद्र के वरिष्ठ संयोजक डॉ. जयलाल यादव ने कहा कि देश में ग्वार शुष्क क्षेत्रों के लिए वर्षा पर आधारित या कम पानी व लागत में उगाई जाने वाली फसल है। ग्वार की फसल किसानों के लिए न सिर्फ अच्छी आय का स्रोत है, बल्कि भूमि की उर्वरक शक्ति को भी बढ़ाती है। उन्नत किस्मों जैसे एचजी 2.20 व 563 का चयन तथा उचित फसल प्रबंधन अपनाकर ग्वार के उत्पादन और उत्पादन को और भी बढ़ाया जा सकता है।
हिंदुस्तान गम एंड केमिकल्स लि. से आए ग्वार विशेषज्ञ डॉ. बी.डी. यादव ने कहा कि ग्वार फसल में खरपरवार प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। कई बार रस चूसने वाले कीटों का आक्रमण हो जाता है। इससे बचाव के लिए 200 मिली मैलाथियान 50 ईसी को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव करें।
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केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. नरेंद्र यादव ने किसानों को ग्वार फसल में लगने वाले कीड़ों व बीमारियों कि रोकथाम व दवाओं के प्रयोग में सावधानियों से अवगत कराया। बिजाई से पहले झुलसा रोग से बचाव के लिए छह किलोग्राम ग्वार का बीज को छह लीटर पानी में छह ग्राम स्ट्रेपटोसाइकलिन के घोल में 20 मिनट तक भिगोकर व छाया में सुखाकर दो ग्राम बाविस्टिन प्रति किलोग्राम बीज के हिसाब से सूखा उपचार करें। इस अवसर पर किसानों को बाजरा, ग्वार, कपास एवं मूंग की फसल में लगने वाले कीड़ों और बीमारियों की वैज्ञानिक जानकारी दी गई तथा किसानों को रबी फसलों की समग्र सिफारिश पुस्तिका भी बांटी गई। इस अवसर पर सहगल फाउंडेशन से डाॅ. संजय, कृष्ण कुमार, पुष्पा सहित 100 से अधिक किसानों व महिलाओं ने भाग लिया।
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