फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सरकारें आईं और गईं, नहीं बना शापिंग काम्पलेक्स

Sun, 22 Jan 2017 11:48 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
खाली पड़ा पुरानी कचहरी का मैदान
विज्ञापन
शहर के मुख्य बाजार के सटे सेंटर प्वाइंट पुरानी कचहरी मैदान को 11 साल से भी अधिक समय से डेवलेप करने की योजना बनी हुई है लेकिन यह योजना अभी तक सिरे नहीं चढ़ पाई है। करोड़ों रुपए की बेशकीमती जमीन वाला यह मैदान आज भी खाली-खाली पड़ा है। अब यह आवारा युवाओं व पशुओं की शरणस्थली भी बनता जा रहा है, तथा कुछ भूमाफियाओं की नजर भी इस पर है। अगर समय रहते इस मैदान को जल्द से जल्द डेवलप नहीं किया गया तो यहां पर लोगों का कब्जा हो जाएगा। हालांकि मौजूदा सरकार ने भी इसको डेवलप करने की योजना बनाई है लेकिन वह भी कई दिनों से सिरे नहीं चढ़ पाई है।
विज्ञापन

ज्ञात हो कि वर्ष 2003-04 में शहर में स्थित पुरानी कचहरी की वर्षों पुरानी बिल्डिंग को तोड़कर उस समय यहां पर शॉपिंग काम्प्लेक्स बनाए जाने की योजना जिला प्रशासन ने बनाई थी। इसके बाद इस बिल्डिंग को तोड़ दिया गया था तथा इसमें स्थित कार्यालयों को अन्यत्र  शिफ्ट कर दिया गया। उस समय इस योजना के तहत प्रशासन की ओर से इसका नक्शा  बनाकर उसे पास भी करा लिया गया था तथा इसमें शापिंग कांप्लेक्स की दो मंजिला इमारत बनने का प्रस्ताव पारित किया गया था। जिसमें डाकघर, बैंक व  अन्य सुविधाएं भी लोगों को मिलनी थी। लोगों ने भी उस समय सरकार के इस निर्णय का स्वागत भी किया था। लोगों के शहर के मुख्य बाजार के साथ विकास  की उम्मीद जगी थी लेकिन 2005 में हुए चुनावों के बाद सरकार बदलते ही यह योजना खटाई में पड़ गई। जिसके बाद से इस योजना की ओर किसी ने भी गौर नहीं किया तथा पुरानी कचहरी मैदान अब अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है।
टूटने से पहले थे कई आफिस
पुरानी कचहरी की पुरानी बिल्डिंग के टूटने से पहले यहां पर कई आफिस थे। जिनमें  ट्रेजरी कार्यालय के अलावा पुरानी कोर्ट डाकघर, एनसीसी व अन्य कई कार्यालय यहां थे। बिल्डिंग टूटने के बाद से ये कार्यालय यहां-वहां स्थानांतरित कर दिए गए।  
विज्ञापन

कंडम हो चुकी थी इमारत
यह इमारत बिल्कुल कंडम हो चुकी थी। जिसके कारण यह लोगों के लिए भी खतरा बन गई थी। इसलिए इसको गिराने पर भी लोगों ने सही ठहराया था।
कभी लगती थी यहां अदालत
पुरानी कचहरी में 1983 तक अदालत लगती थी। यहां पर अधिवक्ता भी बैठते थे। बाद में अगस्त 1983 में नया लघु सचिवालय बनने पर अदालत व अधिवक्ताओं को वहां शिफ्ट कर दिया गया। वरिष्ठ अधिवक्ता व दो बार बार के प्रधान रह चुके राजेंद्र यादव ने बताया कि यहां पर सभी कोर्ट लगती थी। अगस्त 1983 के बाद इसे नई  कोर्ट में शिफ्ट कर दिया गया था।
शहर का मेन प्वाइंट
यह जगह शहर के बिल्कुल बीच व शहर के मुख्य बाजार के पास है। यहां से बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन व अन्य कार्यालयों की दूरी भी बहुत कम है। जिसके कारण इस जगह की कीमत बहुत ज्यादा है। प्रशासन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
शरारती तत्वों का बना अड्डा
पुरानी कचहरी मैदान अब शरारती तत्वों का अड्डा भी बनता जा रहा है। यहां पर सुबह शाम अनेक युवा जमा हो जाते हैं। खुले मैदान का फायदा उठाकर यहां शराब आदि का सेवन भी युवा करते हैं। वहीं यहां पर गंदगी के ढेर भी लगे हुए हैं जिसकी साफ-सफाई की ओर भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
कभी रैली, कभी जागरण होता है यहां
अब इस मैदान  में कभी रैली तो कभी जागरण का आयोजन किया जाता है। जागरण के आयोजन के लिए यह सबसे उपयुक्त जगह बन गई है तथा टाइगर क्लब का नौ दिनों तक चलने वाला  दुर्गा पूजा महोत्सव भी यहां होता है।
बन सकता है माल, शापिंग काम्पलेक्स व मैरिज पैलेस
अब करीब एक वर्ष पूर्व भाजपा सरकार ने फिर से यहां पर शॉपिंग कांप्लेक्स  बनाने की योजना बनाई है। जिसके तहत यहां पर कोई बड़ा माल, शापिंग कांप्लेक्स या विवाह समारोह स्थल, पार्किंग, बैंक व अलावा सामुदायिक भवन भी  बनाया जा सकता है। जिससे शहर के सौंदर्यीकरण के चार चांद लगेंगे। वहीं यहां के लोगों को भी बहुत सुविधाएं घर के पास मिल जाएंगी।
रेहड़ियों के लिए बनाया था स्थान
वर्ष 2015 में फरवरी व मार्च में प्रशासन ने शहर से रेहड़ी हटाओ अभियान चलाकर यहां पर तत्कालीन सीटीएम रोहित यादव के नेतृत्व में रेहड़ी मार्केट बनाया था, मगर वह ज्यादा दिन नहीं चल पाया।
नप ने यहां पर शॉपिंग कांप्लेक्स बनाने के लिए एक प्रस्ताव पास कर सरकार को भेजा है। जिसके तहत सबसे पहले यहां की जमीन को नप के नाम कराना है। इसके बाद ही यहां पर शापिंग कांप्लेक्स आदि बनाया जाएगा।
विज्ञापन

- भारती सैनी, चेयरपर्सन, नगर परिषद, नारनौल
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें