जिले के 21 गांवों में एक भी आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थी का गोल्डन कार्ड नहीं बना है। ऐसे में विभाग अब इन गांवों में लाभार्थियों के गोल्डन कार्ड बनाने के लिए विशेष कार्य योजना तैयार की है। इसमें खुद जिला सूचना प्रबंधक आयुष्मान मित्र और सक्षम युवाओं के साथ इन गांवों में कैंप लगाकर गोल्डन कार्ड बनाने का काम करेंगे। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में 380 गांव हैं। इसमें 21 गांवों में एक भी कार्ड नहीं बना है। महेंद्रगढ़ जिले में कुल 2,08,158 लोगों के गोल्डन कार्ड बनाएं जाने हैं। अभी तक करीब 93 हजार के गोल्डन कार्ड बने हैं।
आयुष्मान भारत के नोडल अधिकारी व डिप्टी सीएमओ डॉ. डीके सैनी ने बताया कि जिले में करीब 21 ऐसे गांव हैं, जहां पर एक भी लाभार्थी का गोल्डन कार्ड नहीं बना है। ऐसे में इन गांवों के लाभार्थियों के कार्ड बनाने के लिए अलग से कार्य योजना तैयार की गई है। डॉ. सैनी ने बताया कि इसके लिए जिला सूचना प्रबंधक सक्षम युवाओं की मदद से गांव में कैंप लगाकर लोगों का गोल्डन कार्ड बनवाएंगे। इस दौरान कोरोना प्रोटोकाल का ध्यान रखा जाएगा। नोडल अधिकारी ने बताया कि जिले में सरकारी अस्पतालों में गोल्डन कार्ड बनाने का तेजी से शुरू हो गया है। ऐसे में जिनका किसी कारण से कार्ड नहीं बना है, वे पास के पास के सीएचसी या नागरिक अस्पताल में गोल्डन कार्ड बनवा सकते हैं। बता दें कि 23 सितंबर 2018 को प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का शुभारंभ हुआ था। योजना में साल 2011 में हुए सामाजिक आर्थिक आंकड़े को आधार मानकर लाभार्थियों की सूची बनाई गई थी। जिले में 45800 परिवार योजना के लाभार्थी हैं। आयुष्मान भारत योजना के चंडीगढ़ स्थित अधिकारियों ने गोल्डन कार्ड की हाल में समीक्षा थी। इसमें पाया गया कि प्रदेश के कई जिलों के गांवों में एक भी गोल्डन कार्ड नहीं बना था। ऐसे में जिलेवार गांवों की सूची संबंधित जिलों को भेज दी गई थी। जिससे इन गांवों में लाभार्थियों के गोल्डन कार्ड बनाए जा सके।
जिला सूचना प्रबंधक उमेश सैनी ने बताया कि जिले में करीब 93 हजार लोगों के गोल्डन कार्ड बन चुके हैं। 21 गांवों में कैंप लगाने के लिए स्वीकृत मिल चुकी है। कोरोना वायरस के प्रोटाकॉल के तहत इन गांवों गोल्डन कार्ड एक-दो दिन में बनाए जाएगे। जिस गांव में कैंप लगेगा,इसकी जानकारी गांव के लोगों को दो दिन पहले मिल जाएगी। जिले में कुल 2,08,158 लोगों के गोल्डन कार्ड बनाएं जाने है। इसमें से अभी तक करीब 93 हजार लोगों के गोल्डन कार्ड बने हैं। जिले में दो सरकारी नागरिक अस्पताल और 12 निजी अस्पताल पैनल पर हैं।
21 गांवों और लाभार्थी
गोकुलपुर में 29, शेखपुरा में 66, ढाणा में 27,खारखड़ा बास में 43, बास खुढ़ाणा में 154, बीर चितलांग में एक, जाटवास में 14, मालड़ा सराय में 52,चेक मलिकपुर में 10, शीमली में 18, बुचुकपुर में 10, लुतुफपुर में 16, मुसुकपुर में 57, ढाणी कुम्हारन में 57, हाजीपुर में तीन, भखरीजा में दो, कनीना रुरल में नौ, नारनौल रुरल में 79 और श्योरामनाथपुरा गांव में आठ लाभार्थी समेत अन्य गांव भी शामिल है। यहां पर कैंप लगाकर कार्ड बनाया जाएगा।
21 गांवों के आयुष्मान भारत के लाभार्थियों का शत-प्रतिशत कार्ड बनाने के लिए काम शुरू किया गया है। इन गांवों में कैंप लगाया जाएगा। इसमें आशा वर्कर्स भी मदद करेंगी। उन्हें भी इन गांव के लोगों के नाम दिए गए हैं। विभाग का प्रयास हैं कि सभी लाभार्थियों के गोल्डन कार्ड बना दिए जाए। लाभार्थी पास के सेंटर पर जाकर अपना कार्ड बनवाएं ताकि योजना का लाभ मिल सके।
- डॉ. अशोक यादव, सीएमओ नारनौल