द प्रोहिबिशन ऑफ एंप्लायमेंट एज मैनुअल स्कैवेंजर्स एंड देयर रिहैबिलिटेशन एक्ट-2013 के तहत हाथ से मैला ढोने पर पूर्णतया प्रतिबंध है। यदि किसी सफाई कर्मचारी की सीवर सफाई के दौरान मृत्यु हो जाती है तो उसके आश्रितों को 10 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है। सभी संबंधित विभागों के अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि कहीं भी इस एक्ट की उल्लंघन न हो। यह बात अतिरिक्त उपायुक्त अनुराग ढालिया ने वीरवार को इस एक्ट के संबंध में लघु सचिवालय में आयोजित अधिकारियों की बैठक में कही।
अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि किसी नागरिक से हाथ से मैला ढोने का काम करवाना गैर जमानती अपराध है। ऐसा करने पर 2 साल जेल की सजा हो सकती है। यह अधिनियम सीवर व टैंक की सफाई को हाथ से करवाने पर निषेध करता है। जो संस्थाएं व कंपनियां ऐसा कार्य करती हैं तो वह इस अधिनियम की धारा 23 (1) के तहत दोषी होती हैं। इस अधिनियम के तहत अपराध गैर जमानती होता है तथा सेक्शन 6 के तहत 2 साल की जेल हो सकती है।
उन्होंने निर्देश दिए कि सफाई कर्मचारियों को अपना व्यवसाय चलाने के लिए अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम से आसान शर्तों पर कर्ज दिलाने के लिए अधिकारी उनकी सहायता करें। उन्होंने कहा कि इस कार्य में लगे हुए सफाई कर्मचारियों के स्वास्थ्य की जांच करने व उन्हें उचित प्रशिक्षण के लिए समय-समय पर कैंप लगवाए जाने चाहिए।
एडीसी ने नगर परिषद व पालिकाओं के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे यह सुनिश्चित करें कि सभी कर्मचारियों को सभी प्रकार के सुरक्षा उपकरण उपलब्ध हैं। बैठक में जन स्वास्थ्य विभाग से अमित जैन, एलडीएम संजय जैन, जिला रेडक्रॉस सचिव श्याम सुंदर, अनिल सैनी, नेतराम बाबूलाल व भागीरथ मल खनगवाल मौजूद रहे।