नारनौल। लोकगीतकार डॉ. कृष्णा आर्या सामाजिक बदलाव की दिशा में निरंतर सक्रिय हैं। डॉ. आर्या मॉरीशस, दुबई, श्रीलंका और वियतनाम सहित कई देशों में हरियाणवी लोकगीतों की प्रस्तुति दे चुकी हैं। हकेंवि से 2015 में लोकगीत विषय पर पीएचडी करने वाली डॉ. आर्या ने परंपरागत लोकगीतों में स्त्री मन की पीड़ा व बेटी के जन्म की आकांक्षा को प्रमुखता से उजागर किया।
इसके साथ ही लोकसंस्कृति संरक्षण प्रकोष्ठ के माध्यम से स्त्री सशक्तिकरण, बालिका सुरक्षा और शिक्षा को लेकर 1236 जागरूकता संगोष्ठियों का आयोजन किया। वहीं 601 नवविवाहित दंपतियों से दहेज रहित विवाह का संकल्प पत्र भरवाया गया।
इसके अलावा “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” अभियान के तहत 117 साइकिल रैलियां निकाली। वहीं कन्या जन्मोत्सव मनाने वाले 760 परिवारों को सम्मानित किया है।
6 जुलाई 1964 को महेंद्रगढ़ के अटेली खंड के गांव गनियार में परमानंद आर्य और शांतिदेवी के घर जन्मी डॉ. आर्या ने ग्रामीण परिवेश से निकलकर शिक्षा और समाज सेवा में विशेष पहचान बनाई। जुलाई 2022 में हरियाणा शिक्षा विभाग से प्रधानाचार्या पद से सेवानिवृत्त होने के बाद भी वे समाजसेवा में सक्रिय हैं।
डॉ. कृष्णा आर्या वर्ष 2000 से सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ी हैं व लगभग 30 सामाजिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक संस्थाओं के साथ मिलकर कार्य कर रही हैं। लोकगीतों और लोकसंस्कृति के संरक्षण के लिए उन्होंने 2014 में लोकसंस्कृति संरक्षण प्रकोष्ठ की स्थापना की।
जल संरक्षण अभियान के तहत गांवों में 500 छोटी जल तलैया बनवाने में महत्वपूर्ण भूमिका रही। जून 2022 से मिशन महेंद्रगढ़ अपना जल टीम के साथ जल संचयन के लिए विशेष प्रयास किए। उन्होंने लोकगीतों के माध्यम से जल के सदुपयोग व अनिवार्यता पर जागरूकता फैलाई।
सड़क सुरक्षा अभियान में दे रहीं सहयोग
2016-17 से सड़क सुरक्षा अभियान में निरंतर अपनी सहभागिता सुनिश्चित करते हुए जिला यातायात पुलिस का निरंतर सहयोग किया। इस दौरान 1000 रिफ्लेक्टर लगाकर यातायात को सुरक्षित करने का कार्य किया। वहीं रक्तदान, आंखों की जांच, हेलमेट वितरण आदि गतिविधियों में भरपूर सहयोग दिया।
समाजसेवा, सहयोग और कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सम्मान
डॉ. आर्या ने शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में आर्थिक सहयोग भी दिया है। जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई, स्कूलों के लिए वाहन व्यवस्था और पुस्तकें उपलब्ध कराने सहित विभिन्न संस्थाओं को आर्थिक सहायता दी। कोविड काल में उन्होंने एक माह का वेतन राहत कोष में दान किया। उनके सामाजिक और सांस्कृतिक योगदान के लिए उन्हें 15 अंतरराष्ट्रीय, 13 राष्ट्रीय, 17 राज्य स्तरीय और 33 जिला स्तरीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।