नारनौल। जिले के हर नुक्कड़, चौक-चौराहों पर अब चुनावी चर्चा ही देखने व सुनने को मिल रही है। लोकसभा प्रत्याशी भी अपने-अपने तरीके से लोगों को अपने पक्ष में वोट डालने की अपील कर रहे हैं। इस बार भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा में बीते दो योजनाओं की तुलना में कम उम्मीदवार मैदान में हैं। अगर वर्ष 2014 की बात करें तो 26 और वर्ष 2019 में 21 और इस बार 17 उम्मीदवार ही चुनावी मैदान में हैं। अब हर उम्मीदवार अपनी जीत को पक्का मान रहे हैं। ऐसे में देखना है कि किस उम्मीदवार के जीत का सेहरा सजेगा, लेकिन अभी तक त्रिकोणीय मुकाबला ही देखने को मिल रहा है।
दो योजनाओं के मुकाबले इस बार कम उम्मीदवार
वर्ष 2014 व 2019 की बात करे तो 20 से ज्यादा ही उम्मीदवार मैदान में थे। इस बाद दो योजनाओं के बाद पहली बार 20 से भी कम उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। इस बार 17 उम्मीदवार ही मैदान में हैं।
वर्ष 2014 में 16 उम्मीदवारों को नोटा से मिले कम वोट
वर्ष 2014 में भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा चुनाव में 26 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था। हालांकि यह अलग बात है कि इनमें 11 उम्मीदवार ऐसे थे, जिनके 1000 से भी कम वोट मिले थे। वहीं 6 उम्मीदवारों को 3000 वोट मिले थे। इस चुनाव में सबसे ज्यादा रोचक बात यह रही कि 16 उम्मीदवारों से ज्यादा नोटा को वोट मिले थे।
वर्ष 2019 में 10 उम्मीदवारों को एक हजार भी नहीं मिले वोट
वर्ष 2019 के चुनाव में 21 उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे। इस 10 उम्मीदवार ऐसे थे, जिन्हें 1000 से भी कम वोट मिले थे। वहीं 6 उम्मीदवार 3000 वोट ही हासिल कर सके थे। इस चुनाव में भी नोटा का प्रभाव 14 उम्मीदवारों से ज्यादा रहा। इस चुनाव में 14 उम्मीदवारों को पीछे छोड़ते हुए ज्यादा वोट हासिल किए गए थे।