भ्रू स्वास्थ्य विभाग की टीम ने एक निजी हेल्थ केयर सेंटर पर भ्रूण लिंग जांच मामले में कार्रवाई की। आरोपी गांव बवानिया में क्लीनिक चलता है और वह भ्रूण लिंग जांच करवाने का काम करता है। वह एक सप्ताह से स्वास्थ्य विभाग के रडार पर था। उसने लिंग जांच के लिए पेंशेंट से ऑनलाइन 50 हजार रुपये लिए थे। आरोपी मरीज को एक हेल्थ केयर सेंटर पर लेकर आया था। इस दौरान टीम ने कार्रवाई कर क्लीनिक संचालक को दबोच लिया। कार्रवाई के दौरान टीम के साथ पुलिस भी मौजूद थी।
सिविल सर्जन कम जिला समुचित प्राधिकरण के चेयरमैन डॉ. अशोक कुमार को गुप्त सूचना मिली थी की गांव बवानियां में आयुष क्लिनिक का संचालक भरत कुमार भ्रूण लिंग जांच करवाता है। इसके लिए जिला समुचित प्राधिकरण द्वारा डॉ. अरुण कालरा, डॉ. हर्ष चौहान, जिला औषधि नियंत्रक हेमंत ग्रोवर व अशोक कुमार डीलिंग सदस्यों की टीम गठित की।
जिला समुचित प्राधिकरण द्वारा गठित टीम ने एक नकली ग्राहक बनाकर भ्रूण लिंग जांच के लिए आयुष क्लिनिक के संचालक भरत कुमार से संपर्क किया गया। भरत कुमार ने अपने ही दूसरे नंबर से डॉ. करण गुप्ता बनकर बात की ओर उन्होंने भ्रूण लिंग जांच के लिए 50 हजार रुपये की मांग की। इसके बाद 50 हजार रुपये भरत कुमार के अकाउंट में ऑनलाइन जमा करवाए।
रुपये डाले जाने के बाद उसने 27 जुलाई को जांच करवाने और सुबह 9:30 बजे सतनाली मोड़ पर मिलने के लिए समय दिया। मंगलवार को तय समय अनुसार डिकॉय पेशेंट से सतनाली चौक पर मिला। वहां से डिकॉय महिला को बस स्टैंड बुलाया। वहां से भरत कुमार महिला को अकेले हेल्थ केयर सेंटर स्थित महेंद्रगढ़ लेकर गया। वहां उसने महिला डॉ. से दिखाकर नॉर्मल अल्ट्रासाउंड करवाया व बाहर आकर महिला के गर्भ में लड़का बताया। डिकॉय गर्भवती महिला के इशारे पर टीम ने मौके पर ही पुलिस के सहयोग से उसे पकड़ लिया। इस बारे में टीम द्वारा महेंद्रगढ़ थाने में पीएनडीटी व धोखाधड़ी की धारा में एफआईआर दर्ज करवा दी।
क्लीनिक संचालक ने चिकित्सक को डिकॉय पेशेंट को अपनी साली बताकर अल्ट्रासाउंड करवाया। क्लीनिक संचालक होने के कारण वह पूर्व में भी यहां अपने मरीजों को लेकर आता रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने हेल्थ केयर सेंटर पर भी जांच की मगर वहां पर किसी प्रकार की कोई खामी नहीं मिली। सीएमओ डॉ. अशोक कुमार के अनुसार हेल्थ केयर सेंटर के भी कागजात जांचे गए जो सही पाए गए। हेल्थ केयर चिकित्सक को उक्त आरोपी की जानकारी ही नहीं थी कि वो इस प्रकार काम करता है। उसने आम पेशेंट की तरह ही अल्ट्रसाउंड किया।
आरोपी के पास पुलिस ने दो सिम भी बरामद की है। एक सिम उसकी डॉ. किरण के नाम से है तथा दूसरी सिम उसके नाम पर है। उसके फोन पे अकाउंट चेक किया गया तो उसमें 20 से 25 हजार रुपये तक पेमेंट आई दिखाई गई है। स्वास्थ्य विभाग उनको लेकर भी जांच कर सकती है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने भ्रूण लिंग जांच मामले कार्रवाई कर एक क्लीनिक संचालक को गिरफ्तार किया है। 50 हजार ऑनलाइन पेमेंट लेकर वह एक निजी केयर सेंटर पर अल्ट्रासाउंड करवाया था। जांच में निजी केयर सेंटर की कोई कमी नहीं मिली है। -डॉ. अशोक सिविल सर्जन, महेंद्रगढ़।