यह बिजली निगम के निजीकरण की शुरुआत है। अगर इसका विरोध नहीं किया गया तो सस्ती बिजली मिलना मुश्किल हो जाएगा। निजी कंपनियां मनमाने दाम बढ़ाएंगी। संगठन से जुड़े सभी किसान बिजली कर्मचारियों के विरोध प्रदर्शन का समर्थन करते हैं और आमजन से भी इस लड़ाई में साथ देने की अपील करते हैं।
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सुबह 9 से शाम 5 बजे तक सिंचाई के लिए बिजली आती है लेकिन हड़ताल के कारण आपूर्ति बंद रही। इससे सरसों की बिजाई में देरी हो रही है।
-मनोज, किसान, गांव टहला, नारनौल।
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बिजली और पेयजल सप्लाई बंद रहने से दैनिक काम प्रभावित हुए। अगर लंबे समय तक बिजली नहीं आई तो खाना पकाने के लिए भी घर में पानी नहीं बचेगा।
-सविता देवी, मोहल्ला रावका, नारनौल।
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सुबह 11 बजे तक घर और दुकान के इनवर्टर की बैटरी डिस्चार्ज हो गई। दोपहर 4 बजे तक मोबाइल की बैटरी भी खत्म हो गई। अब हड़ताल खत्म होने के संदेश का इंतजार है।
-शशिकांत, व्यापारी, अनाज मंडी, नारनौल।
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ई-रिक्शा चलाकर परिवार का गुजारा करता हूं लेकिन बिजली नहीं होने के कारण दोपहर तक ही रिक्शा चला पाया। हड़ताल खत्म नहीं हुई तो कमाई भी बंद रहेगी।
-सिकंदर, ई-रिक्शा चालक, नारनौल
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आटा पीसने और पशुओं का चारा काटने सहित सभी दैनिक काम प्रभावित हैं। ऐसा लग रहा है जैसे अचानक 20 साल पीछे की दुनिया में पहुंच गए हों।
-शीला देवी, गांव सैदपुर।
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सुबह 6 बजे से बिजली नहीं थी। फ्रिज बंद रहने से उसमें रखा दूध और अन्य खाद्य पदार्थ खराब हो गए।
-अंजू देवी, गांव बिहाली।
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दुकान में लगा इलेक्ट्रॉनिक कांटा बंद होने से सब्जी और अन्य सामान तौलने में परेशानी हुई। ग्राहकों को अंदाजे से सब्जी तौलकर देनी पड़ रही है।
-राहुल, मोहल्ला श्याम कॉलोनी।
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दीवाली पर बेचने के लिए मोमबत्तियां मंगवाई थीं लेकिन हड़ताल के चलते अधिकतर मोमबत्तियां एक ही दिन में बिक गईं। रात के अंधेरे की चिंता में लोग मोमबत्तियां खरीद रहे हैं।
-नीलम देवी, मोहल्ला स्टेडियम रोड।
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ग्रामीण क्षेत्र में बिजली नहीं होने से लोगों को कई तरह की परेशानियां हो रही हैं। मोबाइल चार्ज करने के साथ सुबह दूध बिलोने जैसे घरेलू काम भी प्रभावित हो रहे हैं। बिजली पर निर्भर लोगों की दिनचर्या बिगड़ गई है।-
मनोच पंच, गांव निजामपुर।