नारनौल। क्षेत्र में किसान खरीफ फसल उगाने के लिए खेत तैयार कर रहे हैं और बारिश का इंतजार कर रहे हैं। क्षेत्र में खरीफ फसल के दौरान मुख्य तौर पर बाजरे व ग्वार की फसल की खेती की जाती है।
बाजरे व ग्वार की बिजाई के लिए जमीन में नमी होना आवश्यक है, लेकिन मई में अब तक अच्छी बारिश नहीं होने के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार 1 जुलाई से 15 जुलाई तक का समय खरीफ फसल की बिजाई के लिए सबसे उपयुक्त है। वहीं प्री मानसून और मानसून प्रारंभ होने के बाद अगर 50 एमएम से ज्यादा बारिश होती है तो भी फसल की बिजाई की जा सकती है। गत वर्ष भी मानसून सत्र प्रारंभ होने के बाद हुई बारिश के बाद बाजरे की फसल की बिजाई की गई थी।
क्षेत्र में अधिकतर किसान बाजरे की फसल उगाते हैं लेकिन गत कुछ वर्षों से ग्वार के भाव में बढ़ोतरी के कारण किसानों में ग्वार की खेती के प्रति भी रुझान बढ़ा है। इस समय बाजरे का बाजार भाव जहां 2300 से 2400 रुपये प्रति क्विंटल के आस-पास है, वहीं ग्वार का बाजार भाव करीब 5 हजार रुपये प्रति क्विंटल के आस-पास बना हुआ है। लेकिन ग्वार की तुलना में बाजरे की पैदावार अधिक रहती है और आगामी दिनों में बाजरे के भाव में तेजी की संभावना भी बनी हुई है। वहीं जिले में सरकारी खरीद के दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर भी केवल बाजरे की ही खरीद की जाती है। ऐसे में बाजरे की फसल अधिक मुनाफा दे सकती है।
वज्रन
बीते वर्ष ग्वार के भाव में तेजी के कारण अनेक किसानों ने ग्वार की फसल उगाई थी, लेकिन फसल बेचने के दौरान ग्वार के भाव में गिरावट दर्ज की गई थी। वहीं सरकारी खरीद में भी केवल बाजरे की फसल ही खरीदी जाती है, गत वर्ष बाजरे का न्यूनतम समर्थन मूल्य करीब 2625 रुपये था। जिस कारण बाजार भाव में भी तेजी देखने को मिलेगी।
इंद्रलाल, व्यापारी
ट्रैक्टर से जुताई करवाकर खेत को तैयार किया गया है, बाजरे की बिजाई के लिए बारिश का इंतजार है। क्षेत्र में सिंचाई के अभाव में अधिकतर किसान पूरे साल केवल बाजरे की फसल ही उगाते हैं। प्रशासन से अपील है कि बेहतर गुणवत्ता का बीज उचित दाम पर दिया जाए ताकि बेहतर पैदावार हो सकें।
कैलाश चंद, किसान
वर्जन :
बाजरे की बिजाई के लिए उपयुक्त समय 1 जुलाई से 15 जुलाई तक रहता है। 50 एमएम से ज्यादा बारिश होने पर इससे पहले भी बाजरे की बिजाई की जा सकती है। किसान साथियों से अपील है कि समय बीज को कीटनाशक में मिश्रित कर बिजाई करें और उचित प्रकार से खाद का छिड़काव करें ताकि रोग लगने की संभावना को कम किया जा सकें। वहीं मौसम विशेषज्ञों के दिशा-निर्देशानुसार ही बिजाई करें क्योंकि बिजाई के तुरंत बाद बारिश होने से फसल रपट होने की संभावना बनी रहती है।
सतीश कुमार इंदौरा, तकनीकी सहायक कृषि विभाग नारनौल।