महेंद्रगढ़। चार दिनों से खाद-बीज विक्रेताओं और सरकार के नए कानून को लेकर चल रही हड़ताल से अब किसानों की परेशानी बढ़ने लगी है। पशुचारा, सब्जियों व कपास के खाद-बीज नहीं मिलने से बिजाई में देरी हो रही है।
कपास की अगेती बिजाई के लिए सिंचाई किए गए खेत भी बिजाई का इंतजार करते सूख गए हैं। जिले में करीब 570 पंजीकृत खाद-बीज व पेस्टीसाइड विक्रेता चार दिन से हड़ताल पर हैं। किसानों का कहना है कि प्रदेश सरकार व खाद-बीज विक्रेताओं के चल रहे विवाद के कारण उन्हें न ही तो कपास की बिजाई के लिए खाद मिल पा रहा है और न ही पशुचारे के रूप में बिजाई किए जाने वाले बीज मिल पा रहे हैं। बता दें कि हर वर्ष महेंद्रगढ़ जिले में करीब 50 हजार एकड़ में कपास की बिजाई होती है। सरसों की कटाई पूरी होने के बाद ही किसान अगेती कपास के लिए खेतों की तैयारी शुरू कर देते हैं। डार्क जोन में शामिल जिले में खरीफ की फसलें बिजाई के लिए केवल बोरवेल से ही सिंचाई का सहारा है। अप्रैल में एक दिन की देरी होने पर ही दोबारा सिंचाई की नौबत आ जाती है। ऐसे में किसानों को दोबारा सिंचाई करनी पड़ेगी।
खाद बीज एवं कीटनाशक विक्रेता एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष कुलदीप यादव कनीना ने बताया कि चार दिनों से चल रही हड़ताल के कारण जिले में प्रतिदिन औसतन दो करोड़ व चार दिनों में करीब आठ करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है। इस समय खाद, कपास, पशुचारे, सब्जियों के बीज की बड़े पैमाने पर किसानों को आवश्यकता होती है।
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प्रदेश सरकार की ओर से खाद-बीज को लेकर बनाए गए नए कानून के कारण बीज विक्रेताओं ने हड़ताल शुरू कर दी है। हड़ताल के कारण अब किसानों को पशुचारा की बिजाई के लिए बीज नहीं मिल पा रही है। इस समय कपास की बिजाई की सीजन है और किसानों को खाद-बीज की जरूरत है। प्रदेश सरकार इस मुद्दे को जल्द सुलझाए जिससे किसान समय पर बिजाई कर सकें।- रामनिवास, गांव सीगड़ा
इस समय किसानों को अगेती कपास की बिजाई के लिए खाद व बीज की जरूरत है। समय पर बिजाई नहीं होने से आगे पैदावार भी प्रभावित होगी। इस समय किसानों को पशुचारे के लिए ज्वार, बाजर के बीजों की आवश्यकता है। समय पर बीज नहीं मिलने से पशुचारा भी बिजाई नहीं किया जा सका है। प्रदेश सरकार से मांग है कि इस मुद्दे पर जल्द एसोसिएशन से बातचीत करे।- धर्मपाल नंबरदार, गांव पायगा
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किसान को इस समय सब्जियों के बीजों की जरूरत है। क्षेत्र का किसान विशेषकर सरसों की कटाई पूरी होने के बाद ही इनकी बिजाई करता है। किसानों को खीरा, ककड़ी, तरबूज, मूंग सहित अन्य प्रकार के बीजों की जरूरत है, लेकिन पिछले चार दिनों से हड़ताल के कारण कोई भी खाद-बीज की दुकान खुली नहीं है। एक सप्ताह तक हड़ताल चली तो किसानों को दोबारा सिंचाई करनी पड़ेगी।-सुमेर सिंह, गांव अगिहार
अगेती कपास के लिए किसानों की ओर से सरसों की कटाई पूरी होने के बाद ही खेतों की तैयारी शुरू कर दी थी। सिंचाई के बाद मौसम अनुकूल होते ही कपास की बिजाई आरंभ होनी थी, लेकिन चार दिनों से हड़ताल से अब दोबारा से सिंचाई की नौबत आ चुकी है। अप्रैल के प्रथम पखवाड़े में अधिकांश किसान पशुओं के चारे के लिए बिजाई कर देते हैं, लेकिन इस बार नहीं कर पाए हैं।- रण सिंह, गांव भगड़ाना
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