फोटो नंबर-08किसान द्वारा की गई ड्रैगन फ्रूट की खेती।
नारनौल। क्षेत्र में अधिकतर किसान रबी और खरीफ फसलों की पारंपरिक खेती ही करते हैं। इसमें मुख्य तौर पर बाजरा, ग्वार, कपास, गेंहू, जौ और सरसों शामिल है। क्षेत्र में कुछ किसान ऐसे भी है, जो पारंपरिक खेती के साथ-साथ बेर, अमरूद, अनार और ड्रैगन फ्रूट के बाग लगाकर भी अधिक लाभ प्राप्त कर रहें हैं। बागवानी विभाग द्वारा भी ऐसे किसानों को बढ़ावा देने के लिए बहुत सी योजनाएं चलाई जा रही है।
ड्रैगन फ्रूट के पौधे को खंभे के सहारे लगाया जाता है ताकि ड्रैगन का पौधा आसानी से ऊपर की तरफ बढ़ सके। एक खंभे के सहारे चार ड्रैगन के पौधे लगाए जा सकते हैं। वहीं खंभों को निश्चित दूरी पर इस तरीके से लगाया जाता है, जिससे पारंपरिक खेती के लिए ट्रैक्टर द्वारा खेत में जुताई का कार्य भी आसानी से किया जा सके। ड्रैगन फ्रूट के पौधे लगाने के करीब 18 महीने बाद फल आना शुरू हो जाता है और जैसे-जैसे पौधा बढ़ता है, हर साल पैदावार में बढ़ोतरी दर्ज की जाती है। बाजार में ड्रैगन फ्रूट के भाव 150 से 200 रुपए प्रति किलोग्राम बने रहते हैं। किसान ड्रैगन फ्रूट की खेती कर अधिक मुनाफा कमा सकते हैं।
किसान ने एक एकड़ में लगाए 2000 ड्रैगन फ्रूट के पौधे
गांव मूंडिया खेड़ा के 71 वर्षीय किसान मनीराम ने 17 साल डिफेंस में व 19 साल शिक्षा विभाग में भी नौकरी की है। अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ बागवानी भी कर रहे हैं। साथ ही दूसरे लोगों को भी बागवानी के प्रति जागरूक कर रहे हैं। किसान मनीराम ने एक एकड़ में 2000 ड्रैगन के पौधे और ड्रैगन फ्रूट की खेती को बढ़ावा देने के लिए नर्सरी भी बनाई हुई है। नर्सरी में ड्रैगन फ्रूट की विभिन्न प्रजातियों के छोटे-बड़े ड्रैगन के कई पौधे उपलब्ध हैं। किसान मनीराम के मार्गदर्शन में आस-पास के कई किसान ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहें हैं।
मैने करीब एक साल पहले ही ड्रैगन फ्रूट के पौधे अपने खेत में लगाए हैं। ड्रैगन फ्रूट की विभिन्न प्रजातियों की पौध की नर्सरी भी लगा रखी हैं ताकि अन्य लोग जो ड्रैगन फ्रूट की खेती करना चाहते हैं, उन्हें आसानी से पौध उपलब्ध हो सकें। मेरा मानना है कि हर किसान को पारंपरिक खेती के साथ-साथ बागवानी भी करनी चाहिए ताकि अच्छा मुनाफा प्राप्त किया जा सके। बागवानी को इस प्रकार से किया जाए ताकि पारंपरिक खेती का कार्य भी आसानी से किया जा सके।
-मनीराम, किसान, मुंडिया खेड़ा।