नारनौल। शहर के रेलवे स्टेशन परिसर में स्थित जीआरपी चौकी के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में रेलवे ट्रैक पर होने वाले हादसे व आत्महत्या के मामले व प्राकृतिक मौत के मामले घटने का नाम ही नहीं ले रहे हैं।
जीआरपी अधिकारी ने हादसों के पीछे कई कारण बताएं हैं, जो कि वास्तव में ध्यान देने का विषय है। हालांकि इन हादसों पर अंकुश लगाने के लिए जीआरपी हर संभव प्रयास कर रही है। कर्मचारियों की कमी, अज्ञानता, लापरवाही, प्रेम प्रसंग, पारिवारिक व व्यक्तिगत कारणों सहित अनेकों वजह के चलते ऐसे मामले थमने का नाम ही नहीं ले रहे हैं और लोग काल का ग्रास बन रहे हैं।
साल 2020 में 24, 2021 में 31 और साल 2022 में भी 31 मामले आए हैं। इसी तरह साल 2023 में ऐसे हादसों की संख्या 31 रही और इस साल अब तक यह आंकड़ा 19 पहुंच चुका है।
कर्मचारी कम क्षेत्र बड़ा
अधिकारी ने बताया कि उनका एरिया रेवाड़ी जिले के खोरी गांव से शुरू होकर नारनौल होते हुए राजस्थान की सीमा तक लगता है। ऐसे में महिला स्टाफ, मुंशी व सिपाही सभी का मिलाकर कुल 10 ही कर्मचारियों का स्टाफ है। इतने बड़े क्षेत्र को कवर करने के लिए उनके पास कम से कम 25 कर्मचारियों के स्टाफ की जरूरत है।
हादसों की मुख्य वजह
जीआरपी के मुताबिक ट्रेन की चपेट में आने के मुख्य कारणों में लापरवाही सबसे मुख्य वजह है। इसके अलावा पति पत्नी में अनबन, कर्जा, पारिवारिक कलह व प्रेम प्रसंग आदि आत्महत्या करने की प्रमुख वजहों में शामिल हैं।
समय समय पर लगाते हैं कैंप
आमजन को जागरूक करने के लिए रेलवे स्टेशन परिसर में स्पीकर पर थोड़ी थोड़ी देर में अनाउंसमेंट कराया जाता है, ताकि आमजन सचेत व सुरक्षित रहे। साथ ही समय समय पर शिविर लगाकर भी जनता को जागरूक करने का प्रयास किया जाता है। बावजूद इसके लोग लापरवाही बरतते हैं और परिणामस्वरूप अपने बेशकीमती जीवन से हाथ धो बैठते हैं।
यह हैं आंकड़े
माह साल 2023 साल 2024
जनवरी 03 04
फरवरी 01 01
मार्च 02 05
अप्रैल 02 01
मई 01 02
जून 04 04
जुलाई 02 00
अगस्त 04 02
सितंबर 04
अक्टूबर 04
नवंबर 04
दिसंबर 00
(कुल) (31) (19)
आमजन से अपील है कि प्लेटफार्म पर ट्रेन में चढ़ने व उतरने में जल्दी न करें। नियमों का पालन करें और खुद को सुरक्षित रखें। जहां तक हो सके ट्रैक पर न चले और पटरियों को पार करते समय सावधानी बरतें।
कैलाश चंद, जीआरपी चौकी प्रभारी नारनौल।