नारनौल। शहर के बस स्टैंड व नागरिक अस्पताल परिसर में रैन बसेरों की साफ-सफाई, चादर, गद्दे और पीने के पानी आदि सभी प्रकार की सुविधाएं दुरुस्त है लेकिन अस्पताल में प्रसूति विभाग के बाहर सर्दी में बैठे तीमारदारों से जब रैन बसेरे के बारे में पूछा गया तो उन्हें पता ही नहीं था कि अस्पताल परिसर में रैन बसेरा भी मौजूद है।
वहीं, वीरवार रात 9:30 बजे कड़ाके की ठंड में बस स्टैंड के बाहर सड़क किनारे सोता युवक दिखा। हालांकि, यहां से महज 50 मीटर की ही दूरी पर रैन बसेरा है लेकिन जानकारी का अभाव में लोगों को रैन बसेरों की सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
संकेतक बोर्ड नहीं होने से बढ़ी परेशानी
रैन बसेरे के बारे में अधिकतर लोगों को जानकारी नहीं है। वहीं प्रशासन द्वारा भी लोगों को जानकारी देने के लिए किसी भी स्थान पर संकेतक बोर्ड नहीं लगाए गए है। जिस कारण रैन बसरे में सुविधा होने के बावजूद लोग लाभ नहीं उठा पाते। जानकारी के अभाव में लोग सर्द रातों में बस स्टैंड व अस्पताल सहित अन्य स्थान पर रात गुजारते हैं।
22 बिस्तर पुरुषों व 8 महिलाओं के लिए बने
बस स्टैंड व नागरिक अस्पताल परिसर में दो रैन बसेर मौजूद हैं। इन दोनों में 22 बिस्तर पुरुषों व 8 महिलाओं के लिए लगाए गए हैं। हालांकि महिलाओं के बिस्तर अलग कमरे में लगाए गए हैं ताकि वे सहज महसूस कर सकें। इसके अलावा, गर्म पानी के लिए गीजर लगाया हुआ है और दोनों ही रैन बसेरों के नीचे सुलभ शौचलय की व्यवस्था है।
रात को लगाते हैं राउंड
रैन बसेरों के सहायक मंजीत व राहुल ने बताया कि वे रात को 10 से 11 बजे के आसपास रैन बसेरे के नजदीक सड़क पर एक बार राउंड जरूर लगाते हैं। ऐसे में कोई भी व्यक्ति उन्हें खुले में बैठा या सोया हुआ मिलता है तो उसे रैन बसेरे में लाते हैं।
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बहन की डीलीवरी हुई है। दो रात से यहीं कुर्सी पर ही बैठकर गुजार रहा हूं। मुझे पता ही नहीं है कि यहां रैन बसेरे की भी सुविधा है।-गजेंद्र सिंह निवासी गांव रामबास
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बस स्टैंड के बाहर फलों की रेहड़ी लगाता हूं। परिवार बिहार में रह रहा है और मैं तीन माह से इसी रैन बसेरे में रात गुजार रहा हूं। यहां कोई तकलीफ नहीं है।-सचिन निवासी समस्तीपुर, बिहार
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तारीख रुकने वालो की संख्या (रैन बसेरा बस स्टेंड) (रैन बसेरा नागरिक अस्पताल)
1 दिसंबर 02 04
2 दिसंबर 14 14
3 दिसंबर 08 15
4 दिसंबर 05 15
वर्जन:
नप अधिकारियों द्वारा प्रतिदिन रैन बसेरों का जायजा लिया जा रहा है। वहां पर ठहरने वाले लोगों से भी फीडबैक लिया जाता है। कोई कमी पाई जाती है तो उसे दुरुस्त करा दिया जाता है, ताकि रात को रुकने वालों को किस प्रकार की समस्या न आने पाए।-कमलेश सैनी, चेयरपर्सन, नप नारनौल