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आठ वर्ष बीते अलवर चरखी दादरी रेलवे लाइन पर सरकार की नहीं कोई दिलचस्पी

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केंद्र की यूपी-2 सरकार की तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी ने 2012 में अलवर से चरखी दादरी रेलवे लाइन के सर्वे की घोषणा की थी। उसके बाद एनडीए की सरकार ने 2014 में अपने पहले आधे बजट में महेंद्रगढ़ से रेवाड़ी रेलवे लाइन को डबल ट्रैक करने की घोषणा की। दोनों ही घोषणाएं क्षेत्रवासियों के लिए घोषणा बनकर रह गई। वर्तमान सरकार ने किसी भी घोषणा को अमलीजामा नहीं पहनाया। वहीं समान विकास का दावा करने वाली प्रदेश सरकार उत्तरी हरियाणा में ही विकास करवाने पर जोर दे रही है।
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मंगलवार को केंद्र सरकार ने हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर को हरी झंडी दे दी। 5617 करोड़ रुपये की लागत से पांच साल में यह कोरिडोर सोनीपत से पलवल तक बनाया जाएगा। इस प्रोजेक्ट पर प्रदेश सरकार ने पूरी सिफारिश की है। इससे केवल उत्तरी हरियाणा के विकसित जिलों को ही फायदा होगा।
जबकि आठ वर्ष पूर्व घोषित अलवर चरखी दादरी रेलवे लाइन पर सरकार कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रही। जो प्रोजेक्ट घोषित हो रखे हैं उनको भी रद्द करने पर तुली हुई है। क्षेत्र के जन प्रतिनिधि एवं सरकार के वरिष्ठ नेता भी प्रोजेक्ट में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। यहीं कारण है कि केंद्र एवं प्रदेश सरकार महेंद्रगढ़ को इग्नोर कर रही है। वहीं सरताज जनसेवा ग्रुप के पीआरओ ने कहा कि समान विकास करवाने वाली सरकार बताएं, आठ वर्ष हो गए अभी तक अलवर चरखी दादरी रेलवे लाइन क्यों नहीं बनी? इसके अलावा अन्य प्रोजेक्ट क्यों रुके हैं?, नेशनल हाईवे 148बी क्यों नहीं बनाया गया ?
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बता दें कि प्रदेश सरकार पहले से विकसित जिलों को विकसित करने पर लगी हुई है, लेकिन जो क्षेत्र पिछड़े हुए हैं उनके बार में बिल्कुल नहीं सोच रही। पिछली सरकारों की भांति प्रदेश की भाजपा सरकार भी महेंद्रगढ़ के साथ सौतले व्यवहार कर रही है। इस पिछड़े क्षेत्र को विकसित करने के लिए कोई कदम नहीं उठा रही। प्रदेश सरकार ने अपने पहले शासन काल में जिन प्रोजेक्टों की घोषणा की थी उनको भी रद्द करने पर तुली हुई है। सरकार ने पहले नेशनल हाई 148 बी को स्टेट हाईवे में बदलवाया और अभी आईएमटी को रद्द करने के भी पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार ने 5617 हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर की घोषणा कर दी। यह भी प्रदेश सरकार की सिफारिश पर हुआ है। परंतु प्रदेश सरकार ने अलवर चरखी दादरी रेलवे लाइन के लिए कभी दिलचस्पी नहीं दिखाई। इसी वजह से पिछले आठ वर्षों से इस प्रोजेक्ट पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इन से पता चला रहा है कि प्रदेश सरकार महेंद्रगढ़ में कितना समान विकास करवा रही है।
कई बार किया धरना प्रदर्शन
दैनिक रेलयात्री संघ ने अनेक बार धरना प्रदर्शन करके इस लाइन का सर्वे करवाने और दिल्ली-सादलपुर लाइन पर नई रेल गाड़ियां, चलाने की मांग करते रहे है। परंतु न तो अभी तक इस रेल लाइन का सर्वे किया गया तथा न ही सराय रोहिल्ला दिल्ली सादलपुर रेलमार्ग पर नई गाड़ियां चलाई गई है। जिसके चलते व्यापारियों, विद्यार्थियों सैनिकों, एवं कर्मचारियों को भारी परेशानी उठानी पड़ी है।
लाइन बनने से खर्च होगा कम
अलवर से चरखी दादरी सड़क मार्ग का लगभग 160 किलोमीटर का फासला है जिसको तय करने में पांच से सात घंटे का समय लगता है। बस किराया लगभग 180 रुपये खर्च करना पड़ता है। यदि रेल सेवा प्रारंभ हो जाए तो एक यात्री पैसेंजर गाड़ी का लगभग 35 से 40 रुपये तथा एक्सप्रेस गाड़ी का 70 रुपये किराया पड़ता है। बसों में यात्रियों को अधिक समय के साथ-साथ आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है।
डबल ट्रैक बनने से महेंद्रगढ़ तक बढ़ेंगी गाड़ियां
रेवाड़ी से महेंद्रगढ़ तक रेलवे लाइन का डबल ट्रैक कर दिया जाए तो इससे महेंद्रगढ़ की जनता को काफी फायदा होगा। साथ ही रेवाड़ी को रात्रि के समय ठहराव होने वाली गाड़ियों का बोझा भी कम हो जाएगा। जो गाड़ियां रात्रि के समय रेवाड़ी जंक्शन पर खड़ी होती हैं अगर वो महेंद्रगढ़ आकर खड़ी होंगी तो इससे महेंद्रगढ़ की जनता को गाड़ी मिल जाएगी, दूसरा रेवाड़ी स्टेशन पर गाड़ियों का दबाव कम हो जाएगा।
एक दशक से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी अलवर -दादरी रेलवे लाइन बिछानेे की परियोजना सिरे नहीं चढ़ पाई । भाजपा और कांग्रेस दोनों ही सरकारों में नेताओ ने मंच के माध्यम से कई बार इसकी घोषणा करवाई। हम ऐसे नकारा प्रतिनिधि चुनते आए है जो हमारे बीच आके तो बड़ी बड़ी डिंगे हांकते है लेकिन विधानसभा और लोकसभा में जाने के बाद वो गूंगी बहू बन जाते हैं। इसी का नतीजा है कि हम अभी तक अलवर-महेन्द्रगढ़-चरखी दादरी रेल लाइन नहीं बनवा पाए। वर्तमान सरकार को इस मांग को ध्यान में रखते इसी मानसून सत्र में अलवर-दादरी रेलवे लाइन को मंजूरी देकर काम शुरू करवाना चाहिए था ताकि महेन्द्रगढ़ जिले के लोगों का जुड़ाव राजधानी चंडीगढ़ से रेलमार्ग के माध्यम से हो सके ।
कुलदीप यादव, पीआरओ, सरताज जनसेवा ग्रुप।
31 अगस्त को जयपुर जोनल की ऑनलाइन बैठक हुई थी। इस बैठक में मैंने अधिकारियों के सामने अलवर चरखी दादरी रेलवे लाइन का मुद्दा उठाया था। अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि इस बार सर्वे की लिस्ट में इस रूट की सर्वे भी करवा दी जाएगी। मेरी यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक यह लाइन नहीं बिछाई जाती।
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सुंदरलाल जारोसिया, जेडआरयूसीसी सदस्य, जयपुर जोन।
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