पिछले चार से साल से स्थानीय गर्ल्स स्कूल की मेरिट लगातार गिर रही है। कारण जब यहां पढ़ाने के लिए संबंधित अध्यापक ही नहीं होंगे तो सिलेबस कैसे पूरा होगा और बेटियां कैसे अच्छे अंकों के साथ पास होंगी। इसका जवाब न तो जनप्रतिनिधि दे रहे हैं और न ही अफसर। इस कारण अभिभावक भी खासे परेशान हैं।
नांगल चौधरी ब्लॉक में 169 प्राथमिक, मिडिल, सीनियर सेकेंडरी स्कूल हैं। शिक्षा विभाग क्षेत्र के 21 सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में साइंस स्ट्रीम पढ़ा रहा है। खंड के एकमात्र कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में सालाना करीब 80 साइंस स्ट्रीम में दाखिले होते हैं। ग्रामीण विद्यार्थियों का स्ट्रीम की ओर रुझान तो है लेकिन अध्यापकों की कमी और अन्य सुविधाओं का अभाव होने के कारण उनका सिलेबस ही पूरा नहीं हो पा रहा है। वहीं निजी स्कूल संचालक परीक्षा परिणाम बेहतर लाने के लिए जहां स्कूल समय के बाद अतिरिक्त कक्षाएं लगवा रहे हैं। ऐसे में सरकारी स्कूलों के छात्र कैसे उनका मुकाबला करेंगे।
आर्थिक तंगी से पढ़ाई बाधित
सरकारी स्कूल में साइंस विषय पढ़ रही अधिकतर छात्राएं मध्यवर्गीय परिवारों से संबंधित हैं। इनमें पढ़ाई की ललक है, किंतु सुविधा एवं माहौल नहीं मिल रहा। स्कूल प्रशासन कलेक्शन पर आधारित साइंस शिक्षकों की व्यवस्था करता है। अभिभावकों की आर्थिक तंगी के कारण पर्याप्त कलेक्शन एकत्रित नहीं होता। उम्मीद के मुताबिक वेतन नहीं मिलने के कारण निजी अध्यापकों ने सत्र के बीच में पढ़ाना छोड़ दिया। इसका असर छात्राओं के (12वीं) परीक्षा परिणामों पर पड़ रहा है।
डेपुटेशन पर मिले शिक्षक
स्कूल के प्राचार्य बीरसिंह चौधरी ने बताया कि अध्यापकों की किल्लत गंभीर समस्या बनी है। पिछले साल कलेक्शन पर आधारित शिक्षक लगाए थे। अबकी बार शिक्षक डेपुटेशन पर मिले हैं, अभी भी अधिकांश पोस्ट रिक्त पड़ी हैं। इससे छात्राओं का परीक्षा परिणाम प्रभावित हो रहा है। हलका विधायक डा. अभय सिंह यादव और उच्चाधिकारियों को अवगत करवा दिया है।