फोटो संख्या:53 शहर के 11 हट्टा बाजार में भट्ठी पर समोसे बनाता प्रतिष्ठान संचालक। संवाद
महेंद्रगढ़। गैस किल्लत से शहर के खाद्य प्रतिष्ठानों पर संकट गहरा गया है। अब स्थिति यह है कि शहर की हर दुकान पर जहां पहले गैस चूल्हों का उपयोग होता था, वहीं अब मजबूरी में लकड़ी की भट्ठियों का सहारा लिया जा रहा है। शहर की करीब 45 दुकानों से गैस चूल्हे की बजाय भट्ठी पर काम हो रहा है और 25 प्रतिष्ठान गैस आपूर्ति न होने से बंद हो चुके हैं।
व्यवसायिक गैस सिलिंडरों की आपूर्ति व दामों में अचानक हुए बदलाव से व्यापारियों की परेशानी बढ़ गई है। पहले व्यवसायिक सिलिंडर 1500 रुपये में मिलता था लेकिन अब इसकी सरकारी कीमत 3 हजार रुपये तक पहुंच गई है।
इतना ही नहीं, गैस किल्लत के कारण बाजार में सिलिंडर 5000 रुपये तक में बिक रहा है। प्रतिष्ठान संचालक लकड़ी का विकल्प अपनाने को मजबूर हैं। उन्हें बजार में लकड़ी करीब 11 रुपये प्रति किलो के हिसाब से मिल रही है। अब तक 45 प्रतिष्ठानों ने लकड़ी की भट्ठियां लगा ली हैं जबकि करीब 25 दुकानें लागत और संसाधनों के अभाव में बंद हो चुकी हैं।
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खाद्य पदार्थों के बढ़ सकते हैं दाम
व्यापारी जालिम सिंह, बिशंबर, विकास, कृष्ण, अजीत, अशोक कुमार, गौरव सैनी व महेश आदि ने बताया कि लकड़ी के उपयोग से खर्च भी बढ़ा है लेकिन यह खर्च गैस के मुकाबले कम है। प्रतिदिन इन प्रतिष्ठानों पर लगभग 5 क्विंटल लकड़ी की खपत हो रही है। इससे संचालन लागत बढ़ी है और काम पर भी प्रभाव पड़ा है। अगले माह तक हालात नहीं सुधरे तो समोसे, कचौड़ी और अन्य नाश्ते की चीजों के दाम में भी बढ़ोतरी की जाएगी।
एजेंसियों के बाहर लग रही लंबी कतारें
शहर की दो गैस एजेंसियों में गैस सिलिंडर रिफिल कराने के लिए उपभोक्ताओं की लंबी कतारें लग रही हैं। साथ ही सरकार के नियमों के चलते भी विशेषकर व्यापारियों को सिलिंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। घरेलू उपभोक्ता गैस एजेंसियों के चक्कर लगाकर निराश लौट रहे हैं। इसके चलते उपभोक्ता गैस की बजाय लकड़ी आधारित भट्ठी अपना रहे हैं।