नारनौल। शहर के डिपो में पेयजल कनेक्शन नहीं होने के कारण अभी टैंकर व कैंपर के सहारे यात्रियों की प्यास बुझाई जा रही है। इसको लेकर नारनौल डिपो की तरफ से जनस्वास्थ्य विभाग को पत्र भी लिखा गया लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
नारनौल डिपो में प्रतिदिन तीन से चार टैंकर तो 50 से 60 कैंपर मंगाने पड़ रहे हैं। अब कैंपर व टैंकर का करीब का 4 लाख रुपये का बिल बकाया है। पेयजल व बस की धुलाई के लिए पानी की व्यवस्था टैंकर व कैंपर पर निर्भर है।
एक टैंकर का मूल्य करीब 400 रुपये व एक कैंपर का मूल्य 20 रुपये है लेकिन खजाना विभाग द्वारा डिपो परिसर में लगे ट्यूबवेल के पानी के इस्तेमाल की बात कहकर बिल खारिज कर दिए जाते हैं।
इस ट्यूबवेल का पानी में अधिक खारापन होने की वजह से प्रयोग में नहीं लाया जा सकता है। अब लंबे समय तक भुगतान नहीं होने से टैंकर व कैंपर सप्लाई करने वाले लोग भी कई बार बंद कर देते हैं।
10 साल पहले बनाया था ट्यूबवेल
डिपो परिसर में करीब 10 साल पहले ट्यूबवेल शुरू किया गया था लेकिन ट्यूबवेल में पानी में अधिक खारापन होने से पेयजल के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। वहीं खारे पानी से बस की धुलाई का कार्य करने से जंग लगने की संभावना अधिक रहती है। जिस कारण डिपो परिसर व वर्कशॉप में पेयजल व बस की धुलाई के लिए पानी की आपूर्ति की व्यवस्था कैंपर व टैंकर पर निर्भर है। जानकारी के अनुसार एक दिन में करीब 3 से 4 टैंकर पानी बस की धुलाई व यात्रियों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए मंगाए जाते हैं।
डिपो पेयजल सप्लाई कनेक्शन से वंचित
डिपो परिसर में पेयजल सप्लाई कनेक्शन नहीं है जिस कारण यात्रियों के लिए जो प्याऊ बनाई गई है उसकी टंकी को टैंकर से भरा जाता है। कई बार समय पर टैंकर नहीं आने के कारण यात्रियों को बिना पानी के परेशानी का सामना करना पड़ता है। डिपो परिसर में पेयजल सप्लाई कनेक्शन लगाने के लिए डिपो प्रशासन बीते 6 माह में जन स्वास्थ्य विभाग को 2 बार पत्र लिख चुका हैं लेकिन अभी तक पेयजल कनेक्शन शुरू नहीं हो पाया है।
वर्जन :
डिपो परिसर में पेयजल कनेक्शन के लिए जन स्वास्थ्य विभाग को पत्र के माध्यम से अवगत कराया गया है। उम्मीद है जल्द ही पेयजल कनेक्शन लगाया जाएगा। वहीं कैंपर व टैंकर के लंबित बिल का मामला संज्ञान में नहीं है, जानकारी लेकर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। -देवदत्त, महाप्रबंधक, नारनौल डिपो