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Mahendragarh-Narnaul News: नई मंडी प्राथमिक पाठशाला में कमरों के अभाव में बरामदे में बैठकर पढ़ने को मजबूर छात्र

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फोटो- 08नई मंडी प्राथमिक पाठशाला में खुले बरामदे में पढ़ते बच्चे। संवाद
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प्रवीण सैनी
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नारनौल। शहर की नई मंडी प्राथमिक पाठशाला में अध्यापकों और कमरों की कमी के कारण बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पाठशाला में पांच कक्षाओं के 97 बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, लेकिन कमरों की कमी के कारण बच्चे ठंड के अंदर खुले बरामदे में पढ़ने को मजबूर हैं। वहीं, पांच कक्षाओं के बच्चों की जिम्मेदारी केवल दो अध्यापकों पर है। स्कूल प्रशासन द्वारा उच्च विभाग को कमरों और अध्यापकों की कमी के बाबत कई बार अवगत करवाया, मगर समस्या के समाधान के लिए विभाग द्वारा कोई कदम नहीं उठाया गया है।

ठंड के अंदर खुले बरामदे में पढ़ रहे बच्चे
नई मंडी प्राथमिक पाठशाला भवन में दो कमरे और एक किचन उपलब्ध है। इसमें से एक कमरे का उपयोग कक्षा के रूप में और दूसरे कमरे का उपयोग बच्चों को विभिन्न प्रकार की गतिविधियां सिखाने के लिए किया जा रहा है। वहीं, किचन का उपयोग मिड-डे मील के तहत खाना पकाने, खाने का सामना रखने और बर्तन रखने के लिए किया जा रहा है। इस कारण पाठशाला भवन में कमरों की कमी बनी हुई है और बच्चे ठंड में खुले बरामदे में बैठकर पढ़ने को मजबूर है।
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पहले पांच अध्यापक थे, अब केवल दो अध्यापक संभाल रहें पांच कक्षाओं की जिम्मेदारी

नई मंडी प्राथमिक पाठशाला में पहले पांच कक्षाओं के बच्चों के लिए पांच अध्यापक नियुक्त थे। मिली जानकारी के अनुसार पाठशाला में नियुक्त दो अध्यापकों की पदोन्नति हो गई। इसमें एक अध्यापक सेवानिवृत्त हो गया। इस कारण करीब गत दो सालों से पाठशाला में पांच कक्षाओं के 97 बच्चों के लिए केवल दो अध्यापक नियुक्त हैं।

खुले बरामदों को कपड़ा युक्त चिक द्वारा किया जाना चाहिए कवर
पड़ताल में पाया गया कि अधिकतर प्राथमिक पाठशाला में कमरों की कमी की समस्या बनी हुई है। वहीं, समस्या के समाधान के लिए शिक्षा विभाग सुस्त नजर आ रहा है। इस कारण बच्चे खुले बरामदे में पढ़ने को मजबूर हैं। हालांकि, विभिन्न पाठशाला में बनी कमरों की कमी को तुरंत दूर नहीं किया जा सकता है, लेकिन खुले बरामदे को कपड़ा युक्त चिक द्वारा अगर कवर कर दिया जाए तो बच्चों को ठंड में हो रही परेशानी को काफी हद तक दूर किया जा सकता है।
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वर्जन
सरकार व शिक्षा विभाग द्वारा प्राथमिक पाठशाला में पढ़ रहे बच्चों को कई सुविधाएं मुहैया करवाई जा रही है, ताकि बच्चों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। कुछ दिनों पहले जिन पाठशाला में अध्यापक नहीं थे या केवल एक अध्यापक थे वहां अध्यापकों की नियुक्ति की गई थी। वहीं, अब जिन स्कूल में अध्यापकों की कमी बनी हुई, वहां बच्चों की संख्या के हिसाब से अध्यापकों की नियुक्ति की जाएगी। पाठशाला भवन में कमरों और अन्य व्यवस्था के लिए लगातार निरीक्षण किया जाता है, जहां भी कमी रहेगी, उनको जल्द पूरा किया जाएगा।
-सुभाष चंद, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, नारनौल।
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